कार्य बहिष्कार के चलते शक्ति भवन में पसरा सन्नाटा
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दुबे ने कहा कि समिति तत्काल 26 अरब रुपये के भुगतान की मांग नहीं कर रही है, बल्कि इसके भुगतान की गारंटी मांग रही है जिससे बिजली कर्मचारी निश्चिंत होकर काम कर सकें। वर्ष 2000 में भी ऐसी ही गारंटी यूपी सरकार ले चुकी है, इसका गजट भी उपलब्ध है। ऊर्जा विभाग के नौकरशाह वर्तमान में सरकार को गुमराह कर रहे हैं।
लखनऊ में लेसा व मध्यांचल समेत सभी दफ्तरों के बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं ने कार्य बहिष्कार में हिस्सा लिया। शक्ति भवन में हुई सभा संघर्ष समिति के राजीव सिंह, राजपाल सिंह, राजेंद्र घिल्डियाल, विनय शुक्ला, शशिकांत श्रीवास्तव समेत अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने संबोधित किया। उधर, विद्युत कर्मचारी मोर्चा संगठन के कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अवस्थी बब्बू की अध्यक्षता में विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने चेयरमैन अरविंद कुमार से मुलाकात की।
नियमों को दरकिनार कर निवेश
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर जीपीएफ के 2631.20 करोड़ और सीपीएफ के 1491.50 करोड़ रुपये दागी कंपनी डीएचएफएल में निवेश किए गए। कुल 1800 करोड़ मिल चुके हैं, लेकिन जीपीएफ के 1445.70 करोड़ और सीपीएफ के 822.20 करोड़ रुपये डूब गए हैं। यह रकम मात्र 7.75 प्रतिशत ब्याज पर दे दी गई, जो राष्ट्रीयकृत बैंकों के ब्याज दर से भी कम है।
बिजली कर्मियों का प्रदर्शन
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यूपी पावर आफीसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान ट्रस्ट के लगभग 2268 करोड़ डीएचएफएल में अब तक फंसे होने के के मामले में सरकार से गारंटी के लिए कदम उठाने की मांग की।
एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक ऊर्जा मंत्री ने एसोसिएशन को बताया कि जिन कार्मिकों ने जीपीएफ/सीपीएफ से विवाह व अन्य कार्यों के लिए कॉर्पोरेशन से पैसे की मांग की है।
उन्हें कॉर्पोरेशन समय से भुगतान कर रहा है और आगे भी कोई परेशानी नहीं होगी। सरकार पैसा वापसी के लिए हर संभव कदम उठा रही है, जल्द ही सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। प्रतिनिधिमंडल में आरपी केन, अजय कुमार, योगेश कुमार, आदर्श कौशल व अवनीश कुमार शामिल थे।