बिजली कर्मियों के पीएफ घोटाले की जांच में यूपीपीसीएल के लेखा विभाग से जुड़े तीन अधिकारियों को सरकारी गवाह बनाया गया है। इनसे पीएफ राशि की फाइल के सिलसिले में अहम जानकारी व सहयोग मिलने की अपेक्षा है। हालांकि इन तीनों को सरकारी गवाह बनाए जाने के बारे में ईओडब्ल्यू के अधिकारी स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बता रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी इनकी मदद से अपना केस तो मजबूत करेगी ही, साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पीएफ राशि के निवेश की फाइल में किसने क्या नोटिंग की, कहां गलतियों को छिपाया गया और किसकी क्या भूमिका रही।
उधर, ईओडब्ल्यू मुख्यालय में सोमवार को एक फर्जी ब्रोकर फर्म के दो लोगों से पांच घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। इनसे एक तय फॉर्मेट पर सवाल पूछे गए और उनका बयान दर्ज किया गया।
इन दोनों को शाम को इस ताकीद से साथ छोड़ा गया कि बुलाए जाने पर उन्हें फिर हाजिर होना पड़ेगा। जांच एजेंसी ने 14 में से नौ ब्रोकर फर्मों के फर्जी होने की जानकारी सामने आने के बाद इनमें से पांच पर खास नजर रखनी शुरू कर दी है। जिनसे पूछताछ शुरू की गई है, वे इन्हीं में से एक ब्रोकर फर्म से जुड़े हैं।
जांच एजेंसी ने एक अन्य फर्जी ब्रोकर फर्म के तीन लोगों को मंगलवार को पूछताछ के लिए तलब किया है। इनसे भी ब्रोकर फर्मों में जमा राशि और इस पूरे खेल में फर्म की भूमिका पर सवाल किए जाएंगे। ईओडब्ल्यू के अफसरों ने सोमवार को यूपीपीसीएल के कुछ कर्मचारियों केभी बयान दर्ज किए।