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चिप से चोरी कर हर महीने 10-15 लाख रुपये ज्यादा कमाते थे पेट्रोल पंप मालिक

Sat, 29 Apr 2017 09:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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चिप के जरिए पेट्रोल पंप मालिक पेट्रोल चोरी कर हर महीने लाखों की हेराफेरी करते थे। एसटीएफ के हत्‍थे चढ़े राजेंद्र ने इलेक्ट्रॉनिक चिप के जरिए पेट्रोल चोरी का खुलासा किया था।
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एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने अरविंद चतुर्वेदी और उनकी टीम को इसके खुलासे के लिए लगाया। पूछताछ में राजेंद्र ने बताया कि चिप की खासियत यह थी कि उसे रिमोट के जरिए ऑफ करने पर मशीन सही रीडिंग देती थी।

अमित पाठक ने बताया कि लोगों से पैसे के सापेक्ष 5 से 10 प्रतिशत तक कम पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है। इससे औसत बिक्री वाले पेट्रोल पंप हर माह छह से सात लाख रुपये और अच्छी बिक्री करने वाले पेट्रोल पंपों पर 12 से 15 लाख रुपये तक की चोरी की जा रही है।
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पेट्रोल के स्टॉक रजिस्टर में उपलब्‍ध तेल अधिक पाया गया। कुछ स्‍थानों पर डिप नापने वाले मेजरिंग रॉड के केलिब्रेशन में भी छेड़छाड़ सामने आई ताकि टैंक में उपलब्‍ध अतिरिक्त तेल नापने में पकड़ में न आए।

मिलावटी पेट्रोल-डीजल से ग्राहकों पर दोहरी मार

लखनऊ के लगभग 90 फीसदी पेट्रोल पंप मालिक मुनाफा बढ़ाने के लिए सिर्फ घटतौली ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि पेट्रोल व डीजल में मिलावट कर ग्राहकों को दोहरी चपत लगा रहे हैं।

इससे ग्राहकों की जेबों ढीली होने के साथ ही उनके वाहन भी समय से पहले ही कबाड़ बनते जा रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में पंप संचालक फ्यूल टैंक में साल्वेंट की मिलावट करते हैं तो ग्रामीण इलाकों में डीजल में केरोसिन की मिलावट की जाती है।

इसकी रोकथाम के लिए जिम्मेदार आपूर्ति विभाग और तेल कंपनियां अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे रहते हैं। एसटीएफ की छापेमारी में तेल की चोरी के खुलासे के बाद अब जिम्मेदार अधिकारी भी मिलावटी पेट्रोल-डीजल की रोकथाम के लिए नींद से जागेंगे।

सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल में पेंट इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले साल्वेंट मिलाया जाता है। इसे आसानी से पकड़ा नहीं जाता है। यह खुले बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। जबकि तेल कंपनियों के अधिकारियों की मानें तो साल्वेंट की सप्लाई सिर्फ पेंट फैक्ट्रियों को किए जाने का प्रावधान है। इस सॉल्वेंट को अंडरग्राउंट टैंक में मिलाए जाने से ग्राहकों को प्रति लीटर 8 से 10 फीसदी कम तेल पेट्रोल मिलता है।

मिलावटी पेट्रोल-डीजल से इंजन की क्षमता पर असर

- फोटो : amar ujala
मिलावटी पेट्रोल-डीजल के प्रयोग का सीधा वाहनों के इंजन की क्षमता पर पड़ता है। मोटर सर्विस सेंटर संचालित करने वाले मिलन रावत ने बताया कि मौजूदा समय में सर्विस व मरम्मत के लिए आने वाले हर पचास में से एक-एक दो पहिया व चार पहिया वाहन का इंजन खराब मिल है। ऐसा मिलावटी पेट्रोल व डीजल के लगातार इस्तेमाल से ही संभव है।

बाजार भाव पर नकली पेट्रोल-डीजल की सप्लाई
नकली डीजल तैयार करने के लिए केरोसिन इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले केरोसिन में सल्फ्यूरिक एसिड मिलाकर उसके नीले रंग को साफ किया जाता है। फिर चमक लाने के लिए हाइड्रोजन पैरा-ऑक्साइड व लेड ऑक्साइड मिलाया जाता है। बाद में इसे कंपनी स्तर से सप्लाई होने वाली पेट्रोल-डीजल में मिलाकर बाजार दर पर खपा कर मोटा मुनाफा कमाया जाता है।

राजधानी में तैयार होने वाले नकली डीजल को खपाने के लिए टैंकर चालकों से पूरी सेटिंग होती है। तेल डिपो से पंप तक पहुंचाने के बीच रास्ते में ही नकली पेट्रोल-डीजल टैंकरों में मिला दिया जाता है। राजधानी में तैयार होने वाले नकली पेट्रोल-डीजल को ज्यादातर संडीला व हरदोई जिले, व काकोरी, मलिहाबाद व माल से जुड़े ग्रामीण इलाकों में खपाया जाता है।

लैब में सालों अटकी रहती नमूनों की जांच रिपोर्ट

पंप पर मिलावटी पेट्रोल-डीजल की जांच केदौरान रेंडम आधार पर टंकी में पेट्रोल-डीजल की डेनसिटी (घनत्व) टेस्ट करने का प्रावधान है। मानक के तहत घनत्व 15 डिग्री सेंटीग्रेड निर्धारित है। इसमें .0030 सेंटीग्रेटड का अंतर ही अनुमन्य है।

डेनसिटी टेस्ट में संदिग्ध पेट्रोल-डीजल का नमूना सीलबंद कर जांच के लिए इलाहाबाद, मुगलसराय, कानपुर, देहरादून, मथुरा रिफाइनरी व राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा जाता है।

शासनादेश में उल्लेखित मानक के तहत लैब से जांच नमूना की रिपोर्ट अधिकतम दस दिन में जारी होने की व्यवस्था के बाद भी राजधानी में बीते दो साल के दौरान फीलिंग पंपों से लिए गए पेट्रोल-डीजल के आधा दर्जन से अधिक नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी तक लैब स्तर पर लंबित है।

घटतौली व मिलावट की टोल फ्री नंबर पर करें शिकायत
ग्राहक पेट्रोल व डीजल में घटतौली व मिलावट की आशंका होने पर इसकी शिकायत सीधे सप्लाई कंपनियों से जुड़े टोल फ्री नंबर 1800-1800-150 अथवा जिला आपूर्ति विभाग द्वारा संचालित कंट्रोल कक्ष के नंबर 0522-2236320 पर कर सकते हैं। शिकायत मिलने पर तीन दिन में इनका निस्तारण भी सुनिश्चित कराने की व्यवस्था है।

अब रोस्टर बना नियमित होगी पंपों की जांच

डेमो पिक
मामले पर एडीएम आपूर्ति डॉ. अलका वर्मा का कहना है कि पंपों पर बेचे जा रहे पेट्रोल व डीजल में घटतौली व मिलावट को रोकने के लिए प्रशाशन सख्ती बरतेगा।

इसके लिए आपूर्ति विभाग व बाट-माप विभाग की संयुक्त टीम गठित कर अब नियमित तौर पर जिले में संचालित 170 पंपों की रोस्टर आधारित जांच कराई जाएगी।

इस दौरान पंपों पर पेट्रोल और डीजल की गुणवत्ता के साथ ही वितरण के दौरान दी जाने वाली माप और घटतौली की भी सघन निगरानी होगी।

सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों को भी जांच की इस कार्रवाई से सीधे जोड़ा जाएगा। लैब जांच की रिपोर्ट को भी समयबद्ध स्तर पर प्राप्त कराने के लिए प्रशासन शासन को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की संस्तुति करेगा।
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उपभोक्ता हितों से नहीं होने दिया जाएगा खिलवाड़

सांकेतिक चित्र
जिला पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के सचिव सुधीर बोरा कहते हैं कि घटतौली में फंसे पंप संचालकों से डीलर्स एसोसिएशन ने भी किनारा कर लिया है।

कहा, उपभोक्ता हितों से खिलवाड़ कर पूरे कारोबार को बदनाम करने वालों को समर्थन नहीं दिया जाएगा। साथ ही, एसोसिएशन गुणवत्ता के साथ पूरी माप से पेट्रोल और डीजल का वितरण पंपों से सुनिश्चित कराने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाएगा।

वहीं, सप्लाई से जुड़ी तेल कंपनियों के सामने वर्षों से की जा रही डीलर कमीशन बढ़ाने की मांग को भी फिर से उठाया जाएगा ताकि कमीशन बढ़ने से पर्याप्त आय होने पर घटतौली की प्रवृत्ति को प्रभावी तौर पर खत्म कराया जा सके।
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