इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने किसी भी आम चुनाव से पहले राजनीतिक वजहों से सरकारी कोष का दुरुपयोग रोकने की एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
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न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश एक स्थानीय अधिवक्ता की याचिका पर दिया। इसमें किसी भी आम चुनाव की घोषणा से पहले राजनीतिक वजहों से सरकारी धन (जनकोष) का दुरुपयोग रोकने के निर्देश राज्य सरकार समेत संबंधित अन्य पक्षकारों को देने की गुजारिश की गई थी। साथ ही डायवर्जन के जरिए जनकोष का कथित दुरुपयोग रोकने के लिए निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया गया था।
याची ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले ऐसे कई बड़े आयोजनों के उदाहरण देकर आरोप लगाया था कि राजनीतिक वजहों से इनमें बड़ी तादात में डायवर्जन के जरिए जनकोष का इस्तेमाल हुआ। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि याची ने अपने ब्योरे का खुलासा नहीं किया है। सिर्फ इतना कहा कि वह अधिवक्ता है और सामाजिक कार्यकर्ता। लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता होने का कोई प्रमाण पेश नहीं किया। यह भी नहीं कहा कि वह ऐसे निचले तपके के लोगों की आवाज उठा रहा है, जो कोर्ट नहीं आ सकते और याचिका में मूलभूत मानवाधिकारों का जिक्र भी नहीं है। इन्हीं टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।