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UP: विश्वयुद्घों में इस्तेमाल हथियारों में दर्शकों ने दिखाई दिलचस्पी, भीष्म टैंक और आकाश ने भी किया आकर्षित

Thu, 05 Sep 2024 06:51 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सशस्त्र बल समारोह में दर्शकों ने विश्वयुद्घों में इस्तेमाल हथियारों में खास दिलचस्पी दिखाई। वहीं, भीष्म टैंक, आकाश मिसाइल व रडार ने भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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वियतनाम युद्घ हो या इस्राइल-हमास के बीच हुई जंग। प्रथम विश्वयुद्घ हो या सेकेंड वर्ल्ड वॉर। यूरोप से लेकर दुनिया के दूसरे हिस्सों में हुए तमाम युद्घों में इस्तेमाल सैन्य हथियारों ने दर्शकों को आकर्षित किया। दर्शकों ने इन हथियारों में खासी दिलचस्पी दिखाई।

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बात हो रही है मध्य कमान की ओर से सूर्या खेल परिसर में चल रहे सशस्त्र बल समारोह के अंतिम दिन की। दर्शक प्रदर्शनी में जबलपुर की ओर से लगाए गए हेरिटेज वेपन सिस्टम डिस्प्ले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह के अंतिम दिन भीड़ रही। दर्शकों के लिए लड़ाकू जहाज जगुआर का फ्लाईपास्ट किया गया, जिससे रोमांच कई गुना बढ़ गया।

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इसके बाद डॉग शो व बैंड की परफॉर्मेंस ने समां बांध दिया। वहीं, सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी में दर्शकों ने असाल्ट राइफलों, लाइट मशीनगनों से लेकर नौसेना की नौकाओं में अपना रुझान दिखाया। भीष्म टैंक, आकाश मिसाइल व रडार ने भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया।
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हेरिटेज हथियारों ने जीता दिल
सब मशीनगन एमके-3 का इस्तेमाल पहले इंडो चाइना युद्घ, द्वितीय विश्वयुद्घ आदि में किया जाता था। वर्ष 1942 में डिजाइन इन मशीनगन से 450 राउंड प्रति मिनट होते थे। ऐसे ही लाइट मशीन गन, जीएम ब्रेन 303 एमके-1 चेकोस्लोवाकिया में बनी तथा इसे भी द्वितीय विश्वयुद्घ में इस्तेमाल किया गया। इससे 520 राउंड प्रति मिनट होते थे। माउजर, राइफल, पिस्टल भी हेरिटेज डिस्प्ले में रहीं।

सेटेलाइट से कंट्रोल करते हैं शिप
नौसेना के जहाजों में गड़बड़ी होने पर उन्हें सेटेलाइट के जरिए मुख्यालय से कंट्रोल किया जाता है। इसके लिए रेंडर और एग्रीगेटर नाम की दो मशीनों को जहाजों में लगाया जाता है, जो जहाज में गड़बड़ी होने पर तत्काल सूचना मुख्यालय को देता है, जहां इन मशीनों की मदद से पूरे जहाज का नियंत्रण अफसर अपने हाथों में ले लेते हैं और जहाज का बचाने का ऑपरेशन चलाते हैं।

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