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लखनऊ में कोरोना भगाने वाला कार्ड बना चर्चा का विषय, फायदा जाने बिना पहनकर घूम रहे लोग

Fri, 14 Aug 2020 03:42 PM IST
ishwar ashish रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
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कार्ड लटकाए युवक - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में इन दिनों कोरोना को भगाने वाला कार्ड चर्चा का विषय बना है। अधिकतर दवा दुकानों पर ‘गेट आउट कोरोना’, ‘शट आउट कोरोना’ जैसे नामों से यह कार्ड उपलब्ध है। हालांकि इसमें क्या है, इस बारे में कोई कुछ नहीं जानता। किसी को पत्नी ने लाकर दे दिया तो किसी ने दोस्त या किसी शुभचिंतक के कहने पर गले में लटका लिया है। 
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राणा प्रताप मार्ग स्थित दुकानदार से जब कोरोना कार्ड के बारे में पूछा गया तो वह हंसने लगा। उसका कहना था कि दिनभर में 4-5 कार्ड तो बिक ही जाते हैं। उसका कहना था कि इसमें क्या है नहीं मालूम, लोगों को चाहिए, हम दे रहे हैं। निशातगंज स्थित दीपांशु मेडिकल स्टोर संचालक का कहना था कि देखा-देखी लोग पहन रहे है।

मेड इन जापान के बाद यहां भी बनने लगा

- फोटो : amar ujala
दवा कारोबारी अनुपम गुप्ता बताते हैं कि एक में तो सीएलओटू होने की बात सामने आ रही है। जबकि दूसरे में कपूर जैसी खुशबू आती है। लगता है कि जिस तरह दादी-नानी कपूर व लौंग रखती थीं, वैसा ही कुछ है। पहले दिल्ली से मेड इन जापान आ रहा था, अब मेड इन इंडिया भी आने लगा है। 

एक व दो महीने की है वैधता
निरालानगर स्थित दवा दुकानदार ने बताया कि दो तरह के कार्ड हैं। एक ओडोनिल की तरह काम करता है। एक महीने की वैधता वाला कार्ड 100-150 रुपये में है। जबकि दो महीने की वैधता वाले कार्ड की कीमत 200-250 रुपये है। 

इसे बेचने वालों पर कार्रवाई हो

डॉ आशुतोष दुबे - फोटो : अमर उजाला
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे कहते हैं कि इस तरह की किसी भी चीज के लिए न तो आयुष मंत्रालय ने कहा है, न ही आईसीएमआर या विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, उसकी दवा बता कर बेचना गलत है। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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ऐसी चीजों पर नहीं करना चाहिए विश्वास

डॉ शीतल वर्मा - फोटो : amar ujala
ऐसा कोई भी कार्ड मेडिकल बॉडी द्वारा स्वीकृत नहीं है। यह भ्रमित करने वाली बात है और सुरक्षा से खिलवाड़ है। क्लोरिन डाईआक्साइड पानी को विसंक्रमित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लोगों को ऐसी किसी चीज पर भरोसा नहीं करना चाहिए, जिसका कोई तार्किक आधार न हो। मास्क और सामाजिक दूरी का पालन करें। -डॉ. शीतल वर्मा, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, केजीएमयू
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