जनाधार विस्तार में अपरकास्ट को जोड़ने की मुहिम को 2007 से भी आगे जाकर बढ़ाने की पहल की है। वह बताते हैं कि पहले पार्टी के मूल संगठन में मंडल स्तर पर ब्राह्मणों व अपरकास्ट के अन्य लोगों को हिस्सेदारी दी गई। फिर सत्ता में आने पर भगवान परशुराम की विशाल प्रतिमा लगाने, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर उनके नाम पर बनवाने का एलान किया गया। इसी तरह दूसरी जातियों के संतों, महापुरुषों को पूरा आदर सम्मान देने की बात कही गई।
अब ब्राह्मण सहित अपरकास्ट के मिशनरी लोगों को मंडल संगठन की तरह ही जिला, सेक्टर और बूथ संगठन में भागीदारी देने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्हें मूल संगठन के साथ विधानसभा चुनाव में भी भरपूर टिकट और सत्ता में आने पर सरकार में भी मौका मिलेगा।
पार्टी के लोग क्षेत्र में आंकड़ों के साथ बता रहे हैं कि 2007 से 2012 के बीच बसपा राज में कितने टिकट ब्राह्मणों व अपरकास्ट की अन्य जातियों को दिए गए ? सरकार में कितने मंत्री, सरकारी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सलाहकार बनाये गए? सपा और भाजपा सरकार में ब्राह्मण सहित अपरकास्ट की अन्य जातियों की क्या स्थिति रही? इन सबको देखते हुए लोग पार्टी के साथ तेजी से जुड़ रहे हैं।