राज्य कर्मचारियों को कांग्रेस ने फिर निराश कर दिया है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कर्मचारियों की मांग के अनुसार पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का उल्लेख नहीं किया।
अब उन्हें भाजपा के घोषणापत्र का शिद्दत से इंतजार है। अगर भाजपा ने भी कर्मचारियों की मांग को अपने एजेंडे में शामिल नहीं किया तो कर्मचारी संगठन मतदान में नोटा का प्रयोग करने को विवश होंगे।
राज्य कर्मचारी संगठन लोकसभा चुनाव में एकजुट हो गए हैं। सभी पदाधिकारियों ने नई पेंशन नीति समाप्त करने की मांग की है।
संगठनों ने एक सप्ताह पहले ही साफ कर दिया था कि राज्य कर्मचारी उसी दल को वोट देंगे जो उनकी मांगों पर विचार का आश्वासन दे।
राज्य कर्मचारी परिषद ने तय किया है कि अगर सभी प्रमुख दल अपने घोषणापत्र में उनकी मांग का समर्थन नहीं करेंगे तो कर्मचारी नोटा का बटन दबाएंगे।
जवाहर भवन इंदिरा भवन कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश पांडे ने कहा कि कांग्रेस के घोषणापत्र से कर्मचारियों को आघात लगा है। इसके बाद कर्मचारियों ने अन्य दलों से समर्थन की उम्मीद काफी कम कर दी है।
अब राज्य कर्मियों की नजर भाजपा पर है। उन्हें भरोसा है भाजपा उनके साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को दूर करने की पहल अवश्य करेगी।