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पीसीएस अफसर बनीं मिसेज इंडिया, बोलीं- महंगी ड्रेस नहीं, आत्मविश्वास से जीती प्रतियोगिता, तस्वीरें

Tue, 17 Sep 2019 04:42 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
मुंबई में आयोजित मिसेज इंडिया-2019 का खिताब राजधानी की पीसीएस अधिकारी ऋतु सुहास ने जीत लिया है। प्रतियोगिता का फाइनल राउंड रविवार को देर रात सम्पन्न हुआ। इसमें शामिल 20 राज्यों के 59 प्रतिभागियों को आत्मविश्वास से भरी ऋतु ने पीछे छोड़ा। प्रतियोगिता में कुल छह राउंड हुए थे, जिसमें कॉस्ट्यूम व सवाल-जवाब सेशन में ऋतु सबसे आगे रहीं और विजेता बनीं।
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने मुगले आजम की अनारकली ड्रेस पहनी, जिसने निर्णायकों को प्रभावित किया जबकि सवाल-जवाब राउंड में उनसे सफलता और असफलता के मायने पूछे गए। उनका जवाब था कि ये दोनों एक-दूसरे के विलोम नहीं बल्कि पर्यायवाची हैं।
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
असफल होने के बाद लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा है सफलता। सोमवार सुबह राजधानी लौटने पर चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ऋतु सुहास का जोरदार स्वागत हुआ। एलडीए वीसी पीएन सिंह ने भी उनसे मुलाकात कर उन्हें खिताब जीतने के लिए बधाई दी। गौरतलब है कि ऋतु आईएएस अधिकारी व पैरा शटलर सुहास एल वाई की पत्नी हैं। उनके  दो बच्चे हैं।

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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला से बातचीत में ऋतु सुहास ने कहा कि ऑफिस और घर की जिम्मेदारी के बीच प्रतियोगिता की तैयारी चुनौतीपूर्ण तो थी। मैंने काफी पहले से इसकी तैयारी शुरू कर दी थी, क्योंकि मैं लंबा वक्त तैयारियों के लिए नहीं निकाल सकती थी। इसके लिए मैंने घर में लगे वॉल मिरर और घर के सामने के पार्क को चुना।
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
पार्क में रनिंग व व्यायाम और शीशे के आगे वॉक, डांस व अन्य तैयारियों का अभ्यास करती रही। पीसीएस के लिए अपनाई सेल्फ स्टडी की टेक्नीक मैंने मिसेज इंडिया बनने के लिए भी अपनाई और सफल हो गई। ऋतु ने बताया कि स्पीच राउंड में सभी प्रतिभागियों ने महिला सशक्तीकरण पर अपनी बात रखी, लेकिन मैंने नमामि गंगे और स्वच्छ कुंभ पर अपनी बात रखी, जिसे निर्णायक मंडल ने काफी पसंद किया।
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
महंगी ड्रेस नहीं, आत्मविश्वास से जीती प्रतियोगिता
ऋतु कहती हैं कि प्रतियोगिताएं किसी भी स्तर की हों, उनकी तैयारियों पर बेतहाशा खर्च करने से बचना चाहिए। महंगी ड्रेस नहीं बल्कि अपने भीतर का आत्मविश्वास विजेता बनाता है। ऋतु ने बताया कि उन्होंने कॉस्ट्यूम राउंड के लिए ड्रेस अपने एक थियेटर ग्रुप के दोस्त से उधार ली थी और ज्वेलरी किराए पर ली थी जबकि फाइनल राउंड में जो गाउन मैंने पहना वह अमीनाबाद से कपड़ा खरीदकर बनवाया। आमतौर पर ऐसी प्रतियोगिताओं के गाउन काफी महंगे आते हैं। एक बार पहनने के बाद न तो उनका दोबारा इस्तेमाल होता और खरीदने के बाद फिटिंग कराने का झंझट अलग होता है।

 
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
फ्लैश बैक : संघर्षों ने चुनौतियों से जूझना सिखाया
16 अप्रैल 1983 को लखनऊ में हाईकोर्ट के वकील आरपी शर्मा व जनक देवी के घर जन्म हुआ। दो बहन, एक भाई और मम्मी-पापा वाला छोटा सा परिवार। मेरे खानदान में लड़कियों का घर से बाहर निकलना तक अच्छा नहीं माना जाता था। जब पीसीएस की तैयारी करने का फैसला किया तो रिश्तेदार घर से बाहर जाने देने के पक्ष में नहीं थे। मम्मी-पापा मेरे साथ खड़े थे। ये वो दौर था जब हमारा परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। ट्यूशन करने से छोटी-छोटी जरूरतें पूरी हो जाती थीं। 2003 में परीक्षा दी थी, रिजल्ट एक साल बाद आया। बेरोजगारी का वो एक साल काटना मुश्किल था। खैर, 2004 में मेरा सलेक्शन हो गया। पहली पोस्टिंग मथुरा में एसडीएम पद पर थी। उसके बाद आगरा, जौनपुर, सोनभद्र में तैनात रही। अपर नगर आयुक्त इलाहाबाद भी रहीं। 2008 में प्रशासनिक अधिकारी व पैरा शटलर सुहास एल वाई से शादी हुई।

 
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मिसेज इंडिया - फोटो : अमर उजाला
बूथ दोस्त एप बनाने का श्रेय
ऋतु सुहास ने बूथ दोस्त नाम का मोबाइल एप बनाया है। इसका यूपी निकाय चुनाव में आजमगढ़ में प्रयोग के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इलेक्शन कमीशन ने इसे सराहा। मतदान जागरूकता में योगदान के लिए 2015 में राज्यपाल ने सम्मानित किया। 2017 में दिव्यांग दिवस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया। इस एप की मदद से आजमगढ़ सदर और तहसील के लोगों ने दिव्यांग वोटरों को ढूंढा और उसने फार्म भरवाकर वोटिंग कराई थी। इस एप की मदद से 30 हजार नए दिव्यांग वोटर बनाए गए। इसके अलावा कुपोषण का दर्पण और प्रेग्नेंसी का दर्पण एप तैयार किया था। 2018 में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित की जा चुकी हैं।
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