आकांक्षा ने बताया कि मैं भविष्य में एक उत्कृष्ट जज बनना चाहती हूं। मेरे पिता ने पढ़ाई के लिए बचपन में ही मुझे दिल्ली भेज दिया था। यहीं से स्कूलिंग की और बाद में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से लॉ करने के बाद मैं फिर से दिल्ली आ गई और पीसीएस-जे की तैयारी करने लगी।
पहले ही प्रयास में मैंने पहली रैंक हासिल की है। अपने पिता, मां सरस्वती तिवारी और शिक्षकों को इसका श्रेय देती हूं।
टिप्स: दूसरे अभ्यर्थियों को मेरी यह सलाह है कि वे खूब मेहनत करें। सफलता मेहनत से ही मिलती है, इसका कोई शॉर्ट कट नहीं है।