इलाज को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम कवायद कर रही है मगर धरातल पर जो है वह बहुत अफसोस जनक है। इसका जीता जागता नमूना बाराबंकी का जिला अस्पताल है। यहां बीते दो साल से हृदय रोग का डॉक्टर नहीं है और दिल की जांच करने वाली मशीन कमरे में सालों से बंद है। ऐसे में यहां पहुंचने वाले हृदय रोगियों की जान जा रही है।
बुधवार को एक युवक अस्पताल पहुंचा और इलाज के इंतजाम न होने से देखते ही देखते दम तोड़ दिया। देवा क्षेत्र के चंदौली गांव निवासी युवक रणविजय सिंह के सीने में बुधवार करीब 11 बजे तेज दर्द उठा। परिजन उसे लेकर बड़ी उम्मीद से जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन यहां एक स्ट्रेचर मिला जिसके पहिए चल ही नहीं रहे थे। मजबूरी में परिजनों ने उसे अपने हाथों से उठाया और अंदर लेकर पहुंचे लेकिन अफसोस यह कि यहां हृदय का डॉक्टर ही नहीं था।
युवक चिल्ला रहा था कि सीने में तेज दर्द हो रहा है। सांस रुक रही है। बचा लीजिए। ऐसे में प्रशिक्षु के रूप में काम करने वाले डॉक्टर ने उसे ऑक्सीजन देकर सीने पर धक्का मारना शुरू किया। युवक चिल्लाता रहा और कुछ देर बाद उसकी सांसे टूट गईं। इसके बाद उसके नन्हे मुन्ने बच्चे और पत्नी बिलख पड़ी।
यह भी बता दें कि इस जिला अस्पताल का दो बार डिप्टी सीएम बृजेश पाठक दौरा कर चुके हैं और यहां उन्हें बताया गया कि हृदय रोग का डॉक्टर ना होने से हालत गंभीर है। यहां के सीएमएस भी मानते हैं कि ह्रदय रोग के डॉक्टर की जरूरत है मगर तैनाती कब होगी यह भगवान जाने। अभी एक सप्ताह पहले बस्ती जेल के एक बंदी की हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाया गया तो उसने भी दम तोड़ दिया था। कई अन्य की भी मौत भी हो चुकी है।