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ऑक्सीजन खत्म होने से मरीज की जान सांसत में

Mon, 13 Jan 2014 10:19 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से वार्ड में मरीज को शिफ्ट करते समय अचानक सिलेंडर से ऑक्सीजन खत्म हो गई। डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही से मरीज की जान संकट में पड़ गई।
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ऑक्सीजन खत्म होने के बाद जब मरीज को झटके आने लगे तो परिवारीजनों में हड़कंप मच गया।

वार्ड बॉय ने सिलेंडर देखा तो पता चला कि प्रेशर जीरो हो गया था। वह फौरन मरीज को लेकर इमरजेंसी पहुंचा और दूसरा सिलेंडर लगाकर इमरजेंसी में भर्ती किया गया।

सीतापुर के रहने वाले जयवीर (50) को तीन दिन पहले ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। तीन दिन के इलाज के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ।

दोपहर एक बजे डॉक्टरों के कहने पर मरीज को ऑक्सीजन लगाकर वार्ड ब्वॉय गांधी वार्ड ले जाने लगा। मरीज को भेजते वक्त डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सिलेंडर को जांचने की कोशिश भी नहीं की और उसे ऐसे ही वार्ड बॉय के सहारे भेज दिया।
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ट्रॉमा सेंटर के गेट से निकलते ही मरीज को अचानक झटके आने के साथ उसकी सांस फूलने लगी। इसे देख वार्ड बॉय ने तुरंत ऑक्सीजन सिलेंडर की नॉब घुमाई, लेकिन ऑक्सीजन की सप्लाई चालू नहीं हो सकी।

आनन-फानन में परिवार के लोग मरीज को वार्ड बॉय की मदद से ट्रॉमा ले गए। मरीज की हालत देख डॉक्टरों ने उसे वापस इमरजेंसी में भर्ती कर ऑक्सीजन लगाया और पल्स रेट की जांच शुरू की।

दस मिनट तक चली आपाधापी के बाद मरीज की सांसें सामान्य हो सकीं। इसके बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर फिर मरीज को गांधी वार्ड में भेजने की तैयारी करने लगे। इससे नाराज परिवारीजनों ने ट्रॉमा की इमरजेंसी में हंगामा किया।

इमरजेंसी में शोर-शराबा होता देख डॉक्टरों ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया और मरीज को इमरजेंसी में ही भर्ती कर लिया।

डॉक्टरों के रवैये से नाराज घरवालों ने शाम चार बजे राउंड पर आए डॉक्टर से मरीज को डिस्चार्ज करा लिया और प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

कभी प्लांट तो कभी सिलेंडर की कमी बन रही जानलेवा
केजीएमयू में कभी ऑक्सीजन प्लांट तो कभी ऑक्सीजन सिलेंडर मरीजों के लिए आफत बन रहे हैं। बीते एक साल में ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही ही हर बार सामने आ रही है।

ट्रॉमा सेंटर, लारी कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, बाल रोग विभाग, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, जनरल सर्जरी ऑपरेशन थिएटर, प्लास्टिक सर्जरी ऑपरेशन थिएटर, वार्ड, रुमेटोलॉजी, वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग, गांधी वार्ड सहित जहां भी गंभीर मरीज भर्ती होते हैं, वहां ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है।

इनमें आईसीयू, आईसीसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, ट्रॉमा सेंटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडी यूनिट) आदि में तो मरीज की जिंदगी ऑक्सीजन आपूर्ति पर ही निर्भर रहती है। इन सभी विभागों में भर्ती मरीजों के लिए रोजाना 350 से 400 सिलेंडर की खपत है। इसकी आपूर्ति भी दिन भर होती है।

दरअसल, 700 में से 350 सिलेंडर रिफिलिंग के लिए ऑक्सीजन प्लांट में ही पड़े रहते हैं। सूत्रों की मानें तो सिर्फ ट्रॉमा सेंटर में ही रोजाना 200 सिलेंडरों की खपत है। चिविवि के पास अपने 700 सिलेंडर हैं, वो भी 12 प्लांट में अलग-अलग रखे जाते हैं।

ऐसे में जितने भी सिलेंडर खाली होते हैं, उसके बदले उतने ही वापस भरे मिलते हैं।

3000 बेड के अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति का हाल ये है कि यदि एक दिन आपूर्ति ठप हो जाए तो वहां भर्ती मरीज ऑक्सीजन के अभाव में एक-एक कर दम तोड़ने लगते हैं।
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