रामदेव व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
जमीन हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट मीटिंग में पेश न किए जाने को लेकर बाबा रामदेव की पतंजलि ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। बुधवार को सरकार को लिखे गए पत्र में पतंजिलि फूड एवं हर्बल पार्क नोएडा प्रा. लि. की तरह से कहा गया है कि अगर 15 जून 2018 तक सरकार की तरफ से फूड पार्क स्थापित किए जाने पर स्वीकृति नहीं मिलती है तो परियोजना को बिना किसी अग्रिम सूचना के निरस्त कर दिया जाएगा।
दरअसल, सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले सप्ताह बालकृष्ण के इस प्रोजेक्ट को यूपी से बाहर ले जाने के ट्वीट के बाद जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव अगली कैबिनेट में मंजूरी के लिए लाने का निर्देश दिया था। लेकिन मंगलवार (12 जून 2018) को हुई कैबिनेट में इससे जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया। जिसके बाद बुधवार को पतंजलि की तरफ से सरकार को पत्र लिखा गया।
ये है पूरा मामला
बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण में एक मेगाफूड पार्क बना रही है। राज्य सरकार ने इसके लिए 455 एकड़ जमीन दी है। इस पर केंद्रीय खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्रालय से भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद पतंजलि आयुर्वेद ने पूर्व आवंटित 455 एकड़ में से 91 एकड़ जमीन अपनी सब्सीडियरी पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्कनोएडा को हस्तांतरित करने की मांग की।
इस प्रस्ताव पर शासन विचार कर ही रहा था कि पांच जून को पतंजलि के एमडी बाल कृष्ण ने प्रदेश के अफसरों पर जमीन हस्तांतरण से जुड़ी कार्यवाही में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाते हुए नोएडा में बन रहे फूड पार्क को यूपी से बाहर ले जाने की धमकी दे दी। इसके बाद सीएम योगी ने बाबा रामदेव से बात की और अफसरों को कैबिनेट की अगली बैठक में ही जमीन हस्तांतरण से जुड़ा प्रस्ताव लाने को कहा था। अब इस मामले पर पहले इंपावर्ड कमेटी से मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगी।