बड़े विकास प्राधिकरणों की सीमा में नक्शा पास कराना अब महंगा हो जाएगा। सरकार ने लखनऊ समेत वाराणसी, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद व गोरखपुर समेत सभी बड़े शहरों में नक्शा पास कराने के लिए लगने वाले विकास शुल्क में बढ़ोत्तरी का फैसला लिया है। वहीं, गाजियाबाद के लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर जैसे कुल 12 छोटे शहरों के विकास शुल्क दर को घटाकर लोगों को विशेष राहत भी दी गई है।
विज्ञापन
आवास एवं नियोजन विभाग के प्रस्ताव को सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण में क्षेत्र में विकास शुल्क को 1400 से बढ़ाकर 2040 और गाजियाबाद में 2500 से बढ़ाकर 3208 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही कोरोना या आपदा जैसी स्थितियों में विकास शुल्क में छूट देने या किस्तों पर देने की सुविधा दी गई है।
विकास शुल्क के संबंध में 2014 में बनी नियमावली में तमाम विषमताओं को दूर करने के लिए आवास एवं नियोजन विभाग ने ‘उप्र नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण)( प्रथम संशोधन) नियमावली-2021’ तैयार किया था, जिसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा गया था। पुरानी विकास शुल्क नियमावली-2014 में पांच श्रेणियों में 400 से 2500 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क लेने की व्यवस्था थी। प्रस्ताव में आवास विभाग ने 12 शहरों के विकास शुल्क को कम करने और अधिकतर शहरों में में विकास शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया है। बस्ती और मिर्जापुर में नए विकास प्राधिकरणों में विकास शुल्क तय कर दिया गया है। अब यहां 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से विकास शुल्क नक्शा पास करवाते समय लिया जाएगा। मंत्रिपरिषद ने संशोधित नियमावली में आयकर विभाग के कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स को अपनाने की भी मंजूरी दी है। विभाग का तर्क था कि सीपीडब्ल्यूडी का कॉस्ट इंडेक्स प्रदेश के हर शहरों के लिए नहीं है।
विज्ञापन
विकास प्राधिकरणों को विकास शुल्क की दरों का संशोधन हर साल वित्तीय वर्ष में 15 फरवरी को गत वर्ष के आयकर विभाग के कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के आधार पर संशोधित करते हुए 1 अप्रैल से लागू करना होगा। बस्ती व मिर्जापुर नई विकास प्राधिकरणों में विकास शुल्क लेने की व्यवस्था पहली बार लागू की गई है।
इन 12 शहरों के विकास शुल्क में की गई है कमी (प्रति वर्ग मीटर)
लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर (गाजियाबाद) में 2500 से 1200 रुपये
अकबरपुर-माती, बिठूर (कानपुर) में 1400 से 500 रुपये
फतेहपुर सीकरी (आगरा) में 1400 से 500 रुपये
पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर (वाराणसी) में 1000 से 850 रुपये
जहांगीराबाद व शिकारपुर (बुलंदशहर) में 700 से 500 रुपये
गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)में 700 से 500 रुपये
कोसीकला-छाता-चौमुहां-नंदगांव, गोवर्धन-राधाकुंड (मथुरा-वृंदावन) में 700 से 500 रुपये
प्राकृतिक आपदा व महामारी काल में भी मिलेगी छूट
प्रस्ताव के मुताबिक प्राकृतिक आपदा, आग लगने, विस्फोट बाढ़, युद्ध, हड़ताल, आतंकवादी घटना, महामारी, वैश्विक महामारी, नागरिक अशांति आदि की दशा में राज्य सरकार को विकास शुल्क को किस्तों में भुगतान करने व उस पर देय ब्याज की दरों को कम या माफ करने का अधिकार होगा। यह भी व्यवस्था दी गई है कि अधिनियम के अधीन या कैबिनेट की मंजूरी के बाद विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पूर्व में स्वीकृत मानचित्र पर भी लाभ
प्रस्ताव के मुताबिक पूर्व में स्वीकृत नक्शा पर भी नये दरों का लाभ मिलेगा। जैसे किसी भूखंड का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर है और अनुमन्य एफएआर 1.5 प्रतिशत है, तो इसके सभी तलों पर समेकित अधिकतम 150 वर्ग मीटर बिल्ट-अप क्षेत्रफल अनमुन्य किया जाएगा। इसके आधार पर विकास शुल्क की गणना की जाएगी।
एक हेक्टेयर पर किस्तों में भुगतान
बहुउद्देशीय खुले स्थल व क्षेत्रीय पार्क आदि से प्रस्तावित निर्माण के लिए विकास शुल्क पूरे क्षेत्रफल के आधार पर लिए जाने की व्यवस्था थी। इसे संशोधित करते हुए निर्माण योग्य क्षेत्रफल यानी एफएआर के आधार पर कर दिया गया है। मौजूदा समय में पांच हेक्टेयर से बड़े भूखंड के लिए विकास शुल्क का भुगतान किस्तों में लिए जाने की व्यवस्था है। इसे अब एक हेक्टेयर से बड़े भूखंडों पर लागू किया गया है। इसे दो साल में 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लेने की सुविधा दी गई है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा पूर्व स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण कर लिया गया है और परमिट से इतर अतिरिक्त निर्माण का प्रस्ताव होने पर विकास शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे मामलों में अतिरिक्त निर्माण के लिए भूमि क्षेत्रफल के सापेक्ष पूर्व में भुगतान किए गए शुल्क के समायोजन के बाद विकास शुल्क लिया जाएगा।
10 हेक्टेयर से बड़े पार्कों में निर्माण के आधार पर लगेगा विकास शुल्क
संशोधित नियमावली में यह व्यवस्था की गई है कि दस हेक्टेयर से बड़े पार्क, खुले क्षेत्र और क्रीड़ा स्थलों में जितने क्षेत्रफल पर निर्माण होगा, उतने क्षेत्रफल का ही विकास शुल्क जमा किया जाएगा। पहले की नियमावली में यह व्यवस्था थी कि कुल क्षेत्रफल पर विकास शुल्क लिया जाएगा।
इन शहरों में की गई विकास शुल्क में बढ़ोत्तरी (प्रति वर्ग मीटर)
शहर पुराना दर नया दर
लखनऊ 1400 रुपये 2040 रुपये
कानपुर 1400 रुपये 2040 रुपये
वाराणसी 1000 रुपये 1200 रुपये
गाजियाबाद 2500 रुपये 3208 रुपये
आगरा 1400 रुपये 2040 रुपये
प्रयागराज 1000 रुपये 1200 रुपये
मेरठ 1000 रुपये 1200 रुपये
बरेली 700 रुपये 1200 रुपये
मुरादाबाद 700 रुपये 1200 रुपये
मुरादाबाद 700 रुपये 1200 रुपये
गजरौला 700 रुपये 1200 रुपये
अलीगढ़ 700 रुपये 850 रुपये
गोरखपुर 700 रुपये 850 रुपये
बुलंदशहर 700 रुपये 850 रुपये
खुर्जा 700 रुपये 850 रुपये
सहारानपुर 700 रुपये 850 रुपये
मथुरा-वृंदावन 700 रुपये 850 रुपये
झांसी 700 रुपये 850 रुपये
हापुड़-पिलखुवा 700 रुपये 850 रुपये
बागपत-बड़ौत-खेकड़ा 700 रुपये 850 रुपये
सिकंदराबाद 700 रुपये 850 रुपये
न्यू सिकंदराबाद 700 रुपये 850 रुपये
मुजफ्फरनगर 400 रुपये 850 रुपये
फिरोजाबाद-शिकोहाबाद 400 रुपये 850 रुपये
उन्नाव-शुक्लागंज 400 रुपये 850 रुपये
मुजफ्फरनगर 400 रुपये 850 रुपये
शामली 400 रुपये 850 रुपये
खतौली 400 रुपये 850 रुपये
अयोध्या 400 रुपये 500 रुपये
रायबरेली 400 रुपये 500 रुपये
बांदा 400 रुपये 500 रुपये
रामपुर 400 रुपये 500 रुपये
उरई 400 रुपये 500 रुपये
आजमगढ़ 400 रुपये 500 रुपये