निलंबित डीआईजी अरविंद सेन को न्यायिक हिरासत में 9 फरवरी तक के लिए जेल भेज दिया गया। भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश संदीप गुप्ता ने बुधवार को यह आदेश पशुपालन विभाग में टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपियों को बचाने के लिए सेन द्वारा 35 लाख रुपये की रिश्वत लिए जाने के आरोप में दिया।
इससे पहले कोर्ट खुलने के साथ ही सेन कोर्ट में हाजिर हो गए, हालांकि कोर्ट ने आरोपी के आत्मसमर्पण की अर्जी पर तय समय पर ही सुनवाई की। गौरतलब है कि इंदौर के कारोबारी मंजीत सिंह भाटिया ने 13 जून 2020 को हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अप्रैल 2018 में वैभव शुक्ला साथी संतोष शर्मा के साथ इंदौर उनके आवास पर मिलने पहुंचे थे।
उन्हें बताया कि उपनिदेशक पशुपालन व विभागीय मंत्री के करीबी एसके मित्तल अनाज सप्लाई का देना चाहते हैं। बाद में आरोपी आशीष राय ने साथियों मोंटी गुर्जर व अन्य आरोपियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर 9.72 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की, लेकिन भाटिया को टेंडर नहीं मिला। बाद में इस मामले में विवेचक ने मुख्य आरोपी आशीष राय से पूछताछ की।
आशीष ने बताया कि वादी मंजीत भाटिया ने पैसे के लिए दबाव बनाने लगा तो उसने सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी अरविंद सेन से मुलाकात की। सेन ने इस मामले को मैनेज करने के लिए 50 लाख रुपये मांगे, लेकिन बातचीत में 35 लाख रुपये देना तय हुआ।
इसमें से 5 लाख रुपये आशीष ने अरविंद सेन के खाते में जमा कराए गए थे, शेष रकम नकद में दी गई थी। इस मामले में आरोपी आईपीएस अधिकारी अरविंद सेन फरार चल रहे थे। इस पर कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी वारंट, फरारी की उद्घोषणा के साथ ही कुर्की वारंट भी जारी कर दिया था। इसके बाद सेन कोर्ट में हाजिर हुए।