राज्यमंत्री पद से बर्खास्त किए गए मनोज पारस का कहना है कि वह षडयंत्र का शिकार हुए हैं। उनके खिलाफ साजिश रचने वालों में विरोधियों के साथ कुछ ‘अपने’ भी शामिल हैं।
वक्त आने पर साजिशों से पर्दा उठ जाएगा। मनोज पारस ने बृहस्पतिवार को अखबारनवीसों से कहा कि उन्हें अभी तक जानकारी नहीं कि पार्टी नेतृत्व को उनसे क्या शिकायत रही ?
मंत्री पद से हटाने और आरोपों की जानकारी मीडिया के जरिये मिली। उनके परिवार के लोगों पर बसपा से नजदीकी के आरोपों में दूर-दूर तक सच्चाई नहीं है।
न तो उनकी कोई सगी भाभी है न ही परिवार की कोई भाभी जिसके लिए वह बसपा से टिकट चाहते थे, भाई का भी प्रश्न नहीं उठता।
उन्होंने कहा, यदि वह किसी परिजन के लिए टिकट मांगते भी तो दूसरे दल में क्यों जाते? सपा से टिकट की दावेदारी करते।
पहले भी हुई है साजिश
पारस ने कहा, उनके खिलाफ साजिश पहली बार नहीं हुई है। वह 1991 से सपा में हैं। 2001 में साजिश करके उन्हें पार्टी से निकलवाया गया। वर्ष 2002 में बसपा से चुनाव लड़ा और केवल 1800 वोटों से हारा।
उन्हें सपा से निकलवाने की साजिश तब बेनकाब हुई जब पूर्व मंत्री ओमवती सपा में शामिल हो गईं और चुनाव लड़ीं। नेतृत्व के सामने पक्ष रखा तो बाद में पार्टी में ले लिया गया।
2007 में सपा से विधानसभा का टिकट मिला। ओमवती और उनके पति आरके सिंह ने बलात्कार का झूठा केस दर्ज करा दिया। यह चुनाव वह बहुत कम वोटों से हारे।
लोगों ने 2009 में साजिश करके लोकसभा का टिकट कटवा दिया। 2012 में वह 29 हजार से ज्यादा मतों से जीत कर विधायक बने। उनके खिलाफ साजिश रचने वाले शातिर हैं और उनका जल्द खुलासा हो जाएगा।
मुलायम के लिए खून भी देने को तैयार
पारस ने कहा, मेरी पूरी आस्था पार्टी में है और रहेगी। पार्टी उनसे इस्तीफा मांगती तो तत्काल दे देता। मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पद तो क्या खून की एक-एक बूंद देने को तैयार हूं।
लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई जिम्मेदारी देगी तो निभाएंगे, नहीं देगी तो अपनी हैसियत के मुताबिक जो बन पड़ेगा करेंगे। वह पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे।