भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और मुसलमानों व ईसाइयों की नागरिकता रद्द करने की मांग पूरी न करने पर सरयू नदी में जल समाधि लेने की घोषणा करने वाले जगद्गुरू परमहंसाचार्य का संत समिति ने बहिष्कार कर दिया है।
संतों की समिति का कहना है कि महामंडलेश्वर, जगद्गुरु महंत और श्री महंत की अपनी अलग परंपरा होती है। पद की प्राप्ति के लिए संत समिति निर्णय लेती है। जबकि परमहंसाचार्य स्वयंभू जगद्गुरू हैं। संत समिति ने आज उनका बहिष्कार कर दिया है।
वहीं, खुद परमहंस दास ने तपस्वी छावनी के समस्त पदों से इस्तीफा दे दिया था। सूत्रों की माने तो संत समिति के पक्ष में जगद्गुरु परमहंसाचार्य के पीठ के महंत सर्वेश्वर दास ने पहले ही उनका बहिष्कार कर दिया था। ऐसे में परमहंसाचार्य की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
हालांकि, परमहंसाचार्य ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए नवंबर 2023 में दिल्ली के रामलीला मैदान में आमरण अनशन करने की घोषणा की।