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ट्रेनों की पैंट्री होगी बहाल, बेडरोल भी मिलेंगे, लंबी दूरे की ट्रेनों के यात्रियों को मिलेगी राहत

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ट्रेनों में पैंट्रीकार होगी बहाल। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
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कोरोना की वजह से बंद पैंट्रीकार की व्यवस्था बहाल होने जा रही है। इससे लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को खासी राहत हो जाएगी।
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साथ ही एसी बोगियों में बेडरोल देने की भी तैयारी है। उत्तर रेलवे प्रशासन ने इस बाबत आदेश भी जारी कर दिए हैं।
उत्तर रेलवे के अंतर्गत लखनऊ मंडल सहित पांच मंडल आते हैं, जहां से लाखों यात्री रोजाना सफर करते हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान ट्रेनें थमने के साथ ही पैंट्री पर भी ताले लग गए थे।
इससे यात्रियों के लिए खानपान का संकट हो गया था। खासतौर से लंबी दूरी की ट्रेनों में खानपान की डिमांड अवैध वेंडरों के भरोसे ही पूरा होती थी।
ऐसे में उत्तर रेलवे मुख्यालय ने बेडरोल को लेकर जहां लखनऊ सहित उसके क्षेत्र में आने वाले सभी पांच रेल मंडलों को इसकी तैयारी के आदेश दिए हैं।
वहीं, रेलवे बोर्ड ने आईआरसीटीसी मुख्यालय को रसोईयान में खाना बनाने की सुविधा शुरू करने को कहा है। इनकी तारीखें जल्द घोषित कर दी जाएंगी।
रेल अफसरों ने बताया कि 15 नवंबर को रेलवे बोर्ड ने स्पेशल ट्रेनों को पहले की तरह नियमित बनाने का निर्णय लिया।
रेलवे बोर्ड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर टूरिज्म व कैटरिंग वंदना भटनागर ने आइआरसीटीसी मुख्यालय को पहले की तरह ट्रेनों में ही खाना उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
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टिकट में जुड़ेगा कैटरिंग चार्ज
यात्रियों को ट्रेन में खानपान की सुविधाएं दी जाएंगी, जिसके एवज में कैटरिंग चार्ज उनके टिकट में जोड़ा जाएगा। यह 165 से 185 रुपये के बीच होगा। इससे यात्रियों का खर्च भी कम होगा। अभी यात्रियों को ट्रेन में जो खानपान की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, उस पर उन्हें अधिक खर्च करना पड़ता है।
ट्रेनों में बेडरोल भी मिलेगा
उत्तर रेलवे महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने 17 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर लखनऊ मंडल सहित सभी मंडलों को एसी बोगियों में बेडरोल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री फिर से शुरू की जाएंगी और रेलवे ने चादरों, कंबलों व तौलियों की धुलाई सफाई भी शुरू कर दी है। नए सिरे से बेडरोल की धुलाई के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।
सिग्नल फेल होने से ट्रेनेें लेट
शुक्रवार रात मुरादाबाद से शाहजहांपुर के बीच कई रेलवे स्टेशनों पर कोहरे से ट्रेनें फंसी रहीं। जम्मूतवी से वाराणसी जा रही बेगमपुरा एक्सप्रेस पहले जहां कोहरे से लेट हुई। इसके बाद सुबह करीब आठ बजे लखनऊ में स्टेशन के आउटर पर पहुंची, पर सिग्नल फेल होने से सवा नौ बजे प्लेटफॉर्म पर पहुंच सकी। वहीं, सिग्नल फेल होने से चंडीगढ़ एक्सप्रेस भी एक घंटा, देहरादून वाराणसी जनता एक्सप्रेस और दून एक्सप्रेस भी देरी की शिकार हुई। आलमनगर रेलवे स्टेशन से लखनऊ जंक्शन के बीच लखनऊ मेल आधे घंटे तक लेट हुई। वहीं, एसी एक्सप्रेस 25 मिनट तथा दिल्ली अयोध्या कैंट एक्सप्रेस सवा घंटे देरी से पहुंची। इसके कारण यात्रियों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
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चार ट्रेनों पर होगा 45 हजार दैनिक यात्रियों का लोड
कोरोना के केस भले ही न आ रहे हों, लेकिन दैनिक रेल यात्रियों की मुश्किलें बनी हुई हैं। रेलवे ने दैनिक यात्रियों के लिए सिर्फ चार ट्रेनें शुरू की हैं, जिन पर करीब 45 हजार यात्रियों को लोड होगा जबकि, रेलवे प्रशासन चाहे तो बाकी मेमू व पैसेंजरों को शुरू कर यात्रियों को राहत दे सकता है। कोविड से पहले लखनऊ कानपुर सहित अन्य छोटे शहरों के बीच 45 हजार यात्री सफर करते थे। लेकिन रेलवे ने सिर्फ चार ट्रेनें ही शुरू की हैं। जबकि पहले 40 ट्रेनें दौड़ती थीं। दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि दैनिक यात्रियों की सुविधा के लिए मेमू, पैसेंजर ट्रेनों को बहाल करने के बाबत कई पत्र दिए गए हैं। लेकिन रेलवे प्रशासन ने चार ट्रेनें लखनऊ कानपुर, प्रतापगढ़ व फैजाबाद के बीच शुरू की हैं।
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