भाजपा आधिकारिक रूप से पंचायत चुनाव में सिर्फ जिला पंचायत का ही चुनाव लड़ रही है। औसतन चार से छह जिला पंचायत सदस्यों को मिलाकर विधानसभा के एक क्षेत्र हो जाता है।
ऐसे में जिला पंचायत सदस्यों को मिलने वाले वोट को आधार बनाकर भाजपा यह जानने की कोशिश करेगी कि 2017 और 2019 की तुलना में कितने मतों में बढ़ोतरी या कमी आई है। जिसके आधार पर वोटों की गणित दुरुस्ती के अभियान का काम शुरू होगा।
इसके लिए कमजोर इलाकों में न सिर्फ नए और प्रभावी लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, बल्कि वर्तमान सेक्टर तथा बूथ कमेटियों के पुनर्गठन का काम भी शुरू किया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि जिला पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी हर जिले के नतीजों पर मंथन करेगी। क्षेत्रवार, जातिवार नतीजों पर मंथन के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा ने प्रदेश में दो तिहाई बहुमत की सरकार और एक लाख 55 हजार बूथों पर संगठन की शक्ति के बूते सभी 75 जिला पंचायतों में कमल खिलाने की योजना बनाई है।
ये है तैयारी
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव नतीजे आने के बाद क्षेत्रीय एवं जातीय संतुलन बनाते हुए संगठन के ही व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर बैठाने की पार्टी योजना है। ये अध्यक्ष एक तरह से भाजपा के 2022 की चुनावी तैयारियों की महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। कारण, भाजपा ने इन अध्यक्षों के जरिए गांवों के जमीनी विकास की योजना को अमली जामा पहनाकर काम करने वाली सरकार का संदेश देने की तैयारी की है ताकि विधानसभा चुनाव में उसका लाभ मिल सके।