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पंचायत चुनाव: नतीजों से भाजपा तय करेगी 2022 का रोडमैप, तय होगा विधायकों-सांसदों का भविष्य

Mon, 03 May 2021 09:43 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

इन नतीजों से न सिर्फ चुनावी जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारे गए पदाधिकारियों की क्षमता और कुशलता का आकलन होगा, बल्कि भाजपा नेतृत्व परिणामों के विश्लेषण से यह जानने और समझने का प्रयास भी करेगा कि सांगठनिक पेचों को कहां पर कितना कसने या ढीला करने की जरूरत है।
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भाजपा (सांकेतिक चित्र) - फोटो : social media
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विस्तार
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पंचायत चुनाव के नतीजे सिर्फ ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का ही भविष्य नहीं तय करेंगे, बल्कि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का रोडमैप भी तय करेंगे। चुनाव नतीजे भाजपा विधायकों और सांसदों की किस्मत के फैसले की भी पृष्ठभूमि तैयार करेंगे।

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पंचायत चुनाव से भाजपा को न सिर्फ जमीनी पकड़ का अंदाज मिलेगा, बल्कि सांगठनिक कमजोरियों का भी संकेत मिल जाएगा। निश्चित रूप से पार्टी के रणनीतिकार इन नतीजों के परिप्रेक्ष्य में 2022 की चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे।

इन नतीजों से न सिर्फ चुनावी जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारे गए पदाधिकारियों की क्षमता और कुशलता का आकलन होगा, बल्कि भाजपा नेतृत्व परिणामों के विश्लेषण से यह जानने और समझने का प्रयास भी करेगा कि सांगठनिक पेचों को कहां पर कितना कसने या ढीला करने की जरूरत है।

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2017 और 2019 की तुलना में कितने मतों में बढ़ोतरी या कमी आई

भाजपा आधिकारिक रूप से पंचायत चुनाव में सिर्फ जिला पंचायत का ही चुनाव लड़ रही है। औसतन चार से छह जिला पंचायत सदस्यों को मिलाकर विधानसभा के एक क्षेत्र हो जाता है।

ऐसे में जिला पंचायत सदस्यों को मिलने वाले वोट को आधार बनाकर भाजपा यह जानने की कोशिश करेगी कि 2017 और 2019 की तुलना में कितने मतों में बढ़ोतरी या कमी आई है। जिसके आधार पर वोटों की गणित दुरुस्ती के अभियान का काम शुरू होगा।

इसके लिए कमजोर इलाकों में न सिर्फ नए और प्रभावी लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, बल्कि वर्तमान सेक्टर तथा बूथ कमेटियों के पुनर्गठन का काम भी शुरू किया जा सकता है।
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हर जिले के परिणाम का होगा मंथन

सूत्रों का कहना है कि जिला पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी हर जिले के नतीजों पर मंथन करेगी। क्षेत्रवार, जातिवार नतीजों पर मंथन के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा ने प्रदेश में दो तिहाई बहुमत की सरकार और एक लाख 55 हजार बूथों पर संगठन की शक्ति के बूते सभी 75 जिला पंचायतों में कमल खिलाने की योजना बनाई है।

ये है तैयारी
जिला पंचायत सदस्य के चुनाव नतीजे आने के बाद क्षेत्रीय एवं जातीय संतुलन बनाते हुए संगठन के ही व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर बैठाने की पार्टी योजना है। ये अध्यक्ष एक तरह से भाजपा के 2022 की चुनावी तैयारियों की महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। कारण, भाजपा ने इन अध्यक्षों के जरिए गांवों के जमीनी विकास की योजना को अमली जामा पहनाकर काम करने वाली सरकार का संदेश देने की तैयारी की है ताकि विधानसभा चुनाव में उसका लाभ मिल सके।
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