ममता बनर्जी अपने लखनऊ दौरे में सांस्कृतिक मुद्दा भी उठा चुकी हैं। उन्होंने गंगा सागर मेले का जिक्र करते हुए कहा था कि उस आयोजन में अयोध्या के संत आयोजक की भूमिका में होते हैं, पर उसका पूरा खर्च पश्चिम बंगाल सरकार उठाती है। क्योंकि हम धर्मनिरपेक्ष राजनीति करते हैं और उसे मानते हैं। ममता की रणनीति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह भाजपा के साथ-साथ असदुद्दीन ओवैसी पर भी हमलावर हैं। जबकि अन्य दलों के प्रति उनका रवैया नर्म रहता है।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा रहीं ताकत
ममता बनर्जी कांग्रेस में भी सेंधमारी कर रही हैं। उन्होंने चुनाव के वक्त साथ छोड़कर जाने वालों को अपने खेमे में वापस ले लिया और कांग्रेस नेताओं को भी जोड़ा है। गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री एडवर्ड फलेरियो अब तृणमूल में हैं। ममता ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया है। मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा भी तृणमूल में आ गए हैं। कांग्रेस की सांसद रह चुकीं सुष्मिता देव भी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के यूपी से पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी भी टीएमसी में हैं।