किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में जल्द ही हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएस) सॉफ्टवेयर के माध्यम से ओपीडी का संचालन होगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। एचआईएस के माध्यम से हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) की दवाओं के साथ ही मरीजों का ब्योरा भी ऑनलाइन हो जाएगा। इसके बाद निगरानी आसान हो जाएगी।
केजीएमयू के एचआरएफ स्टोर में दवाएं होने के बावजूद डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। अमर उजाला ने अभियान के माध्यम से यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने एचआईएस सॉफ्टवेयर पर काम करने की बात कही है। संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सुरेश कुमार ने बताया कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही ओपीडी का संचालन होगा। दवाएं कंप्यूटर पर ही लिखकर उसका प्रिंट आउट निकाला जाएगा। एचआरएफ काउंटर पर भी यह अपडेट हो जाएगा। ऐसा होने पर मरीजों को एचआरएफ की उपलब्ध दवाएं मिलने लगेंगी। डॉक्टर को बाहर की दवाएं अलग से लिखनी होंगी। ऐसा करने पर वे रडार पर आएंगे। सॉफ्टवेयर के लिए केजीएमयू प्रशासन ने कंप्यूटर खरीदने की योजना भी तैयार कर ली है।
बाहर से दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों को नोटिस
केजीएमयू की ओपीडी में अपठनीय भाषा और बाहर से दवाएं लिखने के मामले में केजीएमयू प्रशासन नोटिस जारी करेगा। इस मामले में एक वरिष्ठ डॉक्टर से गोपनीय आख्या मांगी गई है। इसके साथ ही कई अन्य डॉक्टरों को भी नोटिस जारी किया जाएगा।
ओपीडी में एचआरएफ का नया काउंटर खुलने के बाद बढ़ेगा दायरा
केजीएमयू एचआरएफ के चेयरमैन डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि ओपीडी में भूतल पर अल्ट्रासाउंड वाले स्थान पर नया काउंटर खोला जाएगा। अभी न्यू ओपीडी में करीब चार हजार मरीज आते हैं। बाकी चार हजार मरीज लारी, क्वीन मेरी, मानसिक रोग और हड्डी रोग के विभागों में आते हैं। इनकी ओपीडी संबधित विभागों में ही चलती है। डॉ. शांतनु के मुताबिक नया ओपीडी काउंटर खुलने पर कम से कम 50 फीसदी मरीजों को एचआरएफ के माध्यम से वहीं पर दवाएं मिल जाएंगी। इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा।
Iकेजीएमयू प्रशासन मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए एचआईएस सॉफ्टवेयर अपनाया जाएगा। इस पर काम चल रहा है। सस्ती दवाएं देने के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, संस्थान उठाएगा। I
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- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयूI