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एलयू में यूजी-पीजी प्रवेश आवेदन 15 मार्च से, 10 फीसदी सीट वृद्धि पर प्रवेश समिति ने लगाई मुहर

Tue, 12 Mar 2019 01:22 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ विश्वविद्यालय में नए सत्र 2019-20 में स्नातक, परास्नातक व डिप्लोमा कोर्सों में प्रवेश के लिए आवेदन 15 मार्च से शुरू होंगे। प्रवेश आवेदन विश्वविद्यालय की वेबसाइट lkouniv.ac.in पर उपलब्ध लिंक से ऑनलाइन किए जाएंगे।
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आवेदन बिना विलंब शुल्क के 10 अप्रैल व विलंब शुल्क के साथ 15 अप्रैल तक होंगे। इसके साथ ही विवि ने 10 फीसदी सीट वृद्धि को भी हरी झंडी दे दी। बीए, पीजी, बीपीएड-एमपीएड को छोड़कर पहली बार अन्य सभी कोर्सों की प्रवेश काउंसलिंग ऑनलाइन कराई जाएगी। प्रवेश परीक्षा 25 अप्रैल से 3 मई के बीच आयोजित की जाएंगी।

सोमवार को कुलपति प्रो. एसपी सिंह की अध्यक्षता में प्रवेश समिति की बैठक हुई। इसमें केमिस्ट्री विभाग के प्रो. अनिल मिश्रा को दोबारा यूजी-पीजी कोर्सों में प्रवेश के लिए समन्वयक मनोनीत किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने चर्चा के बाद तय किया कि केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए 10 फीसदी सीट वृद्धि की जाएगी। विवि में अभी यूजी की लगभग 3500 और पीजी की लगभग 4500 सीटें हैं। 10 फीसदी सीट वृद्धि के बाद लगभग 800 सीटें और बढ़ जाएंगी।
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इसकी विस्तृत सूचना आगे जारी की जाएगी। वहीं एलएलबी पांच वर्षीय, बीकॉम ऑनर्स, बीकॉम, बीसीए, बीवॉक, बीएससी मैथ्स, बीएससी बायो, बीबीए-एमबीए पांच वर्षीय, बीएलएड, एमएड, एमबीए की प्रवेश काउंसलिंग ऑनलाइन कराने का निर्णय लिया गया। इसके लिए विद्यार्थियों से 200 रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाएगा। ऑनलाइन काउंसलिंग से विद्यार्थियों का काफी खर्च बचेगा। जबकि बीए, पीजी, बीपीएड, एमपीएड की काउंसलिंग ऑनलाइन ऑन कैंपस कराने का निर्णय लिया गया।

 
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परास्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए पहले के नियमों में सख्ती

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विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति ने परास्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए पहले के नियमों में सख्ती की है। अब आप जिस विषय में परास्नातक करना चाहते हैं, अगर आपने स्नातक में वह विषय नहीं पढ़ा है तो प्रवेश के लिए अर्हता स्नातक में 60 फीसदी होगी। जो अब तक 50 फीसदी थी।

प्रवेश समिति में पिछले साल समाजशास्त्र विभाग में प्रवेश के दौरान आई समस्या का उल्लेख किया गया। इसके बाद तय किया गया कि विद्यार्थी ने अगर स्नातक अंतिम वर्ष में वह विषय पढ़ा है और उसी से पीजी करना चाहता है तो स्नातक में उसकी अर्हता न्यूनतम 45 फीसदी अंक होगी।

वहीं अगर उसने स्नातक में दो साल उस विषय को पढ़ा है और अंतिम वर्ष में छोड़ दिया और वह उस विषय से पीजी करना चाहता है तो उसे स्नातक में 55 फीसदी अंक प्राप्त करना जरूरी है। वहीं अगर विद्यार्थी ने तीनों साल वह विषय स्नातक में नहीं पढ़ा और उस विषय से पीजी करना चाहता है तो उसे स्नातक में न्यूनतम 60 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

इसी क्रम में यह भी निर्णय लिया गया कि अगर स्नातक स्तर पर वह विषय विश्वविद्यालय में नहीं है और उस विषय में विद्यार्थी पीजी करना चाहता है तो उसके लिए उसे स्नातक में न्यूनतम 50 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। तभी वह पीजी प्रवेश आवेदन के लिए अर्ह होगा।
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