भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर का चार दिन का लखनऊ प्रवास अपने पीछे कई संकेतों व चर्चाओं को छोड़ गया है। प्रदेश प्रभारी बनने के बाद बिना किसी औपचारिक एजेंडे के चार दिन प्रदेश मुख्यालय पर रहना और अलग-अलग तरह के पदाधिकारियों से मिलना व अन्य कई सामान्य मुद्दों पर बातचीत से यह साफ हो गया है कि चार दिन का यह फीडबैक ही भाजपा हाईकमान के मिशन-यूपी का आधार बनेगा।
साथ ही प्रदेश मुख्यालय से लेकर जिलों तक न सिर्फ कार्यालयों की कार्यप्रणाली की दुरुस्ती होगी बल्कि इनकी व्यवस्थाओं को भी बदला जाएगा।
संगठन में काम करने वाले लोगों से अलग-अलग फोरम पर बातचीत और एक-एक बिंदु पर बारीकी से पूछताछ से यह साफ हो गया है कि मोदी और उनके सिपहसालार 2017 के चुनाव की तैयारियों को लेकर काफी सजग हैं। शायद यही वजह रही कि माथुर ने चार दिन के प्रवास में लोगों से बातचीत करके सदस्यता का सच जाना।
संगठन के पदाधिकारियों के कार्यकर्ताओं से संवाद व संपर्क की सच्चाई समझी। मीडिया प्रकोष्ठ तक के लोगों की कार्यप्रणाली पर बातचीत से यह जानने का प्रयास किया कि मीडिया प्रकोष्ठ व पार्टी प्रवक्ता किस तरह के मुद्दों पर किस तरह के तर्क मीडिया के सामने रखते हैं।