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चार दिनों के फीडबैक पर बनेगा भाजपा का मिशन यूपी प्लान!

Sat, 18 Apr 2015 09:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर का चार दिन का लखनऊ प्रवास अपने पीछे कई संकेतों व चर्चाओं को छोड़ गया है। प्रदेश प्रभारी बनने के बाद बिना किसी औपचारिक एजेंडे के चार दिन प्रदेश मुख्यालय पर रहना और अलग-अलग तरह के पदाधिकारियों से मिलना व अन्य कई सामान्य मुद्दों पर बातचीत से यह साफ हो गया है कि चार दिन का यह फीडबैक ही भाजपा हाईकमान के मिशन-यूपी का आधार बनेगा।
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साथ ही प्रदेश मुख्यालय से लेकर जिलों तक न सिर्फ कार्यालयों की कार्यप्रणाली की दुरुस्ती होगी बल्कि इनकी व्यवस्थाओं को भी बदला जाएगा।

संगठन में काम करने वाले लोगों से अलग-अलग फोरम पर बातचीत और एक-एक बिंदु पर बारीकी से पूछताछ से यह साफ हो गया है कि मोदी और उनके सिपहसालार 2017 के चुनाव की तैयारियों को लेकर काफी सजग हैं। शायद यही वजह रही कि माथुर ने चार दिन के प्रवास में लोगों से बातचीत करके सदस्यता का सच जाना।

संगठन के पदाधिकारियों के कार्यकर्ताओं से संवाद व संपर्क की सच्चाई समझी। मीडिया प्रकोष्ठ तक के लोगों की कार्यप्रणाली पर बातचीत से यह जानने का प्रयास किया कि मीडिया प्रकोष्ठ व पार्टी प्रवक्ता किस तरह के मुद्दों पर किस तरह के तर्क मीडिया के सामने रखते हैं।
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पार्टी के कामकाज से नहीं दिखे खुश

बातचीत में उन्होंने कई बार पार्टी के लोगों के कामकाज पर सवालिया निशान भी लगाए। उदाहरण के लिए मीडिया प्रकोष्ठ के लोगों से बातचीत में उन्होंने विज्ञप्तियों से संगठनात्मक मुद्दों से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही एक से अधिक बयानों पर नाराजगी जताई।

इसी तरह उन्होंने कार्यालय के कामकाज को आम जनता की समस्याओं से जोड़ने पर जोर दिया। इस सिलसिले में उन्होंने पदाधिकारियों के दिमाग से यह बात निकालने की कोशिश की कि उनका काम सिर्फ संगठनात्मक सीमाओं के भीतर ही बंधा है।

माथुर ने सभी को समझाने की प्रयास किया कि राजनीतिक दल का कार्यकर्ता होने के नाते पदाधिकारियों को लोगों की समस्याओं का समाधान कराने का भी प्रयास करना चाहिए। माथुर बूथ तक संगठन के कामकाज के फीडबैक से बहुत संतुष्ट नहीं दिखे।

शायद इसीलिए उन्होंने जिलों से लेकर प्रदेश तक के संगठन को अलग-अलग तरह के पदाधिकारियों के हवाले करने की सलाह दी। साथ ही हिदायत दी कि संपर्क अभियान में इस काम की सच्चाई परखी जाएगी।
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