एक आईएएस अफसर को पूर्वांचल के एक मंडल की कमिश्नरी से हटाकर दूसरी जगह भेजने का आश्वासन दिया गया।
पर, उन्हें बैठा दिया गया निदेशालय में। ये अफसर जिस कमिश्नरी से हटाए गए थे, वहां काफी चर्चित हुए थे। इनकी सक्रियता से जिलों में कलेक्टर के यहां धरना-प्रदर्शन तक कम हो गए थे।
निदेशालय में वही रवैया रहा तो सरकार को कुछ दिन बाद उन्हें दूसरे विभाग में भेजना पड़ गया। वह यहां अभी कुछ समझ पाते तब तक तीसरे में जाने की नौबत आ गई।
दूसरों से काम कराने में कम, खुद करने में ज्यादा यकीन रखने वाले इस अफसर की याद सरकार को हाल ही तब आई जब वह महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं से दो-चार हुई।
बताते हैं कि थोड़ा सख्त रवैये वाले इस अफसर ने फील्ड में पुरानी पोस्टिंग पाने के साथ ही अपनी पहचान के हिसाब से काम शुरू कर दिया है।
पर, अफसर के दूसरे साथियों को उम्मीद है कि वह जिस तरह सक्रिय हुए हैं, उससे साफ है कि वह जल्दी ही फिर सचिवालय लौट आएंगे।
वजह, वह अब वरिष्ठता लाइन में आने के बावजूद पिछली और मौजूदा सरकार के मिजाज का अंतर समझने को तैयार नहीं हैं।