सचिव स्तर के एक अफसर रिटायरमेंट के 12 साल बाद तक एक विभाग में अपनी विशेषज्ञता का लाभ लेते रहे। पिछले दिनों सरकार के सामने उनका कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव फिर गया तो सरकार ने हाथ खड़े कर दिए।
बताया जाता है कि सरकार ने पिछले साल कार्यकाल बढ़ाते ही लिख दिया था कि यह अंतिम मौका है। आगे कार्यकाल नहीं बढ़ेगा।
60 वर्ष में रिटायरमेंट के बाद 12 वर्ष तक नियमित अधिकारी के रूप में सेवाएं देने के बावजूद कार्यकाल न बढ़ाए जाने से ये वेटरन अधिकारी काफी क्षुब्ध बताए जाते हैं।
हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि सरकार उन्हें दूसरे विभाग में समायोजित करने पर विचार कर रही है। पर, जिस विभाग में समायोजन करने की तैयारी है वहां पहले से एक विशेष सचिव स्तर के एक वेटरन अफसर जमे हुए हैं।
जब से उन्हें दूसरे के आने की सुगबुगाहट मिली है, वे खासे सक्रिय हो गए हैं। लोगों की नजर है कि युवा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बुजुर्ग सचिव साहब 73वें साल की नौकरी कर पाते हैं या नहीं।