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गोमती रिवर फ्रंट घपले में नेताओं को क्लीन चिट, अफसर व इंजीनियरों पर गिरेगी गाज

Sun, 04 Jun 2017 01:11 AM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
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गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में घपले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय करने के लिए बनाई गई सुरेश खन्ना कमेटी ने परियोजना से जुड़े राजनेताओं को क्लीन चिट दे दी है। कमेटी आला अधिकारियों और इंजीनियरों को ही कार्रवाई के दायरे में लाने पर विचार कर रही है।
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हालांकि कमेटी 15 जून तक अपनी रिपोर्ट सीएम को सौंपेगी, पर उसके इस फैसले की भनक लगते ही नौकरशाही में अंदरखाने गुस्सा दिख रहा है। अफसरों का कहना है कि अनियमितताओं की जिम्मेदारी से राजनेताओं को मुक्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनकी मंशा से ही सारे काम होते हैं।

इस परियोजना के लिए पिछली सरकार ने 1513 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इसमें से 1437 करोड़ रुपये यानी 95 फीसदी राशि जारी कर दी गई। इसके बावजूद 60 फीसदी काम भी पूरा नहीं हुआ। मामला तब बिगड़ा, जब प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए सिंचाई विभाग ने सरकार से 900 करोड़ रुपये की और डिमांड कर डाली।
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इस पर योगी सरकार ने कार्यभार संभालते ही परियोजना की जांच कराने का फैसला ले लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मौका मुआयना किया। इसके फौरन बाद न्यायिक जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया।

जांच में हर कदम पर मिले घपले

- फोटो : amar ujala
न्यायिक जांच में हर कदम पर घपले ही घपले मिले। न तो टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई और न ही सामान खरीद में किफायत की सोची गई। यहां तक कि बाजार मूल्य से ज्यादा दर पर चीजें खरीदी गईं।

जो सामान काफी कम रेट में देश में ही मिल सकता था, उसे यूरोप से करोड़ों रुपये खर्च करके मंगाया गया। परियोजना का एस्टीमेट भी बेहद चलताऊ अंदाज में बनाया गया।

राजधानी में गोमती को साफ करने की योजना तो बनाई गई, पर उससे आगे महज 8 किलोमीटर की दूरी पर नदी में मिलने वाले नालों की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में गोमती को साफ करने के मकसद से स्वीकृत की गई यह परियोजना बेमकसद साबित हुई।

ये शामिल थे कमेटी में

- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्यवाही तय करने के लिए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए।

इसमें राजस्व परिषद के चेयरमैन प्रवीर कुमार व अपर मुख्य सचिव, वित्त अनूपचंद्र पांडेय सदस्य और प्रमुख सचिव, न्याय रंगनाथ पांडेय बतौर सदस्य सचिव शामिल किए गए हैं। कमेटी से कहा गया कि वो स्पष्ट सिफारिश दे कि किस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।

अधिकारी विशेष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए या विभागीय कार्रवाई की जाए। शासन के सूत्रों के मुताबिक, खन्ना कमेटी ने परियोजना की स्वीकृति से लेकर इस पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दौरान जुड़े रहे राजनेताओं के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की सिफारिश न करने का फैसला किया है।

तर्क दिया जा रहा है कि योजना आला अधिकारियों ने बनाई और उसे अमली जामा सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने पहनाया। इसलिए पूरे मामले में वे ही दोषी हैं।
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अफसरों के गले नहीं उतर रही दलील

- फोटो : amar ujala
खन्ना कमेटी का इस नतीजे पर पहुंचना आला अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा। उनका कहना है कि किसी भी सरकार में काम राजनेताओं के कहने पर ही होते हैं। इसलिए उनकी भी बराबर की जिम्मेदारी बनती है।

वैसे भी गोमती रिवर फ्रंट परियोजना से जुड़े नीतिगत फैसले पिछली सपा सरकार की कैबिनेट ने लिए हैं, इसलिए सिर्फ अधिकारियों और इंजीनियरों को कार्रवाई के दायरे में लाना उचित नहीं है।
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