लखनऊ। केजीएमयू के तदर्थ कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मनमाफिक तरीके से पेंशन व भत्ते देने के मामले की जांच शुरू हो गई है। शासन ने केजीएमयू प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर जांच करके रिपोर्ट मांगी है। शासन के पत्र से केजीएमयू प्रशासन में खलबली मची है।
प्रतापगढ़ के पूर्व सांसद व नेता जनसत्ता दल लोकतांत्रिक कुंवर अक्षय प्रताप सिंह ने शासन को 24 मई 2025 को पत्र लिखा था। इसमें कुलपति कार्यालय से रिटायर एक कर्मचारी का हवाला दिया। कर्मचारी की तैनाती तदर्थ पद हुई थी। आरोप है कि रिटायरमेंट पर अफसरों ने कर्मचारी पर मेहरबानी दिखाई। गलत तरीके से पेंशन व अन्य अनियमित बिल का भुगतान किया गया है। शासन में अनु सचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ला ने दो जुलाई 2025 को केजीएमयू कुलसचिव को पत्र भेजकर पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। शासन के पत्र में लिखा है कि तदर्थ कर्मचारी को नियम विरुद्ध रिटारमेंट लाभ व पेंशन प्रदान करने के मामले की जांच कराई जाए। तदर्थ कर्मचारी को किस आधार पर पेंशन भत्ते दिए गए।
वित्त मंत्री ने मामले का लिया संज्ञान
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी पूर्व सांसद की शिकायत का संज्ञान लिया है। शासन से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद पेंशन निदेशालय से संपर्क किया गया। पेंशन निदेशालय ने 30 मई को पत्र में प्रकरण चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय से संबद्ध होने की बात कही। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने केजीएमयू प्रशासन से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।