केस 1: ‘चाहे नौकरी से निकाल दीजिए, पर सुन लीजिए’
छत्तीसगढ़ के चक्रधरपुर मंडल के एक आला रेलवे अधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (सीआरबी) से कहा कि अगर डिपार्टमेंटलिज्म इतना ही हावी है तो राजस्व कैसे बढ़ रहा है। यह सभी विभागों के सामंजस्य से ही संभव हुआ है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि चाहे मुझे नौकरी से निकाल दीजिए, पर मेरी बात सुन लीजिए।
केस 2: ऐसे तो खत्म हो जाएगी विशेषज्ञता
पश्चिमी रेलवे जोन के अहमदाबाद मंडल के वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि महाप्रबंधक और रेलमंत्री से वह सम्मानित किए जा चुके हैं। उत्कृष्टता शील्ड भी मिली है। यह सब सिर्फ अपनी क्षमताओं की वजह से हुआ, जो कि उन्हें एकाउंट में हासिल है। ऐसे में काडर विलय होने पर अगर उन्हें दूसरा काम दिया गया तो कर ही नहीं पाएंगे। विशेषज्ञता खत्म हो जाएगी।
केस 3: ‘आईपीएस छोड़ बना आईआरटीएस’
पूर्व मध्य रेलवे जोन में ऑपरेटिंग डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीआरबी से कहा कि यूपीएससी की परीक्षा में वह आईपीएस के लिए सेलेक्ट हुए थे। पर, उनका रुझान रेलवे ट्रैफिक मैनेजमेंट के प्रति था। इसलिए आईपीएस छोड़कर आईआरटीएस बने। काडर मर्ज कर अधिकारियों का मनोबल न गिराया जाए। यह रेलवे के हित में नहीं है।
काडर विलय के खिलाफ रेलवे अधिकारियों की यह नाराजगी तो महज बानगी है। सोशल मीडिया से लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तक में अधिकारी इसके खिलाफ खुलकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। हाल ही में इस मुद्दे को लेकर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीकेयादव के साथ रेलवे अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी हुई। इसमें अधिकारियों ने बताया कि काडर विलय का सीधा असर रेलवे की सुरक्षा पर पड़ेगा जो कि यात्रियों की जान से जुड़ा हुआ है। यह कदम उनकी जान जोखिम में डालने जैसा होगा।
बगैर प्लान ले लिया अप्रूवल
दरअसल, रेल मंत्रालय रेलवे के ट्रैफिक, वित्त, कार्मिक, स्टोर सहित आठ काडरों का विलय कर इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (आईआरएमएस) बना रहा है। इसके खिलाफ रेलवे अधिकारियों में खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि बढ़ते खर्चे, बढ़ता ऑपरेटिंग रेशियो, महंगा मालभाड़ा, ट्रेनों की लेटलतीफी मूल मुद्दे हैं, लेकिन इन पर ध्यान देने के बजाय काडर विलय पर फोकस किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि काडर विलय करने का अप्रूवल कैबिनेट में पहले ही ले लिया गया, यूपीएससी से बातचीत तक नहीं की गई। इंजीनियरिंग कोर में जहां 22 से 25 वर्ष में अधिकारी बन जाते हैं, वहीं यूपीएससी के जरिए आईआरटीएस, आईआरएएस बनने में 30 साल तक लग जाते हैं।
ऐसे में वरिष्ठता में पीछे होने पर इन्हें डीआरएम, जीएम, सीआरबी बनने का मौका नहीं मिलेगा। इस पर कहा गया कि ऐसा प्लान बनाया जाएगा कि सबको डीआरएम, जीएम बनने का मौका मिले।
जब ‘कुछ नहीं बदलेगा’ तो विलय क्यों
रेलवे अफसरों ने बताया, सीआरबी का कहना है कि सभी अधिकारी अपने विभागवार ही काम करेंगे। उनकी वरिष्ठता व प्रमोशन का क्रम भी वैसा ही रहेगा। उनके कामकाज में कोई बदलाव नहीं आएगा। इस पर अधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब सब कुछ वैसा ही रहेगा तो फिर विलय की जरूरत ही क्या है? वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सीआरबी इसका जवाब नहीं दे पाए।
बैठक में तय की रणनीति
उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की क्लास वन ऑफिसर्स एसोसिएशन के अधिकारियों ने बैठक कर इस मामले पर अपनी बात व पूरा पक्ष सीआरबी व रेलमंत्री के समक्ष रखने की रणनीति बनाई है। बैठक में आरडीएसओ, रेलवे वर्कशॉप सहित दोनों मंडलों के आला अधिकारी मौजूद रहे।