लखनऊ। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राजधानी में गरीबों को स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम सुस्त पड़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तय किए गए लक्ष्यों के सापेक्ष अक्तूबर 2025 तक लखनऊ में महज 55% उपलब्धि ही दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस लचर प्रदर्शन के पीछे मिशन से जुड़े अधिकारियों और बैंक अफसरों की कम दिलचस्पी को मुख्य वजह माना जा रहा है।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ में 3,550 स्वयं सहायता समूहों को 49.60 करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य था। इसके विपरीत अक्तूबर तक केवल 1,967 समूहों को 27.09 करोड़ रुपये का कर्ज ही बांटा जा सका। वहीं, वाराणसी और बरेली जैसे जिलों ने अपने लक्ष्य से अधिक या उसके करीब काम कर लखनऊ को पीछे छोड़ दिया है।
आंकड़ों की जुबानी (जिलावार प्रगति):
जिला
लक्ष्य (समूह)
प्रगति (उपलब्धि)
महाराजगंज
4060
4875
बरेली
3960
4503
वाराणसी
3450
3425
लखनऊ
3550
1967
Iजिले में 80 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है और करीब 2700 स्वयं सहायता समूह लाभान्वित हो चुके हैं। वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले शेष समूहों को भी लाभान्वित करने का लक्ष्य है।
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- अजीत सिंह, डीडीओI