बारिश में बीमारियों के साथ सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के मुकाबले इन दिनों सड़क हादसों में घायल होकर आने वालों की संख्या करीब 40 फीसदी बढ़ी है। इसी अनुपात में मृतकों की संख्या भी बढ़ी है।
फरवरी में रोजाना सड़क हादसों में घायल होने वाले औसतन 100 लोग केजीएमयू पहुंच रहे थे। इसमें 10 से 20 फीसदी की हालत बेहद गंभीर होती थी। जुलाई में बारिश शुरू होने के बाद इस समय रोजाना औसतन 140 से ज्यादा घायल ट्रॉमा सेंटर पहुंच रहे हैं। सामान्य तौर पर सर्दी के मौसम में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। इसके पीछे कोहरा बड़ी वजह होता है।
इस बार बारिश के मौसम में भी सामान्य के मुकाबले ज्यादा घायल रोजाना ट्रॉमा सेंटर आ रहे हैं। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ. वैभव जायसवाल के मुताबिक वाहन की अधिक गति और गाड़ी फिसलने के साथ ही नशे में वाहन चलाने, नींद आने, जानवर के आने व सड़क की खराब स्थिति को इन हादसों की वजह माना जा रहा है।
औसतन रोजाना 10 घायलों की हो रही मौत
केजीएमयू का ट्रॉमा सेंटर प्रदेश में इस समय लेवल-1 का एकमात्र सेंटर है। सामान्य रूप से लेवल-1 ट्रॉमा सेंटरों में कुल मरीजों में से औसत मृत्यु दर 11 फीसदी तक है। वहीं, केजीएमयू में औसत मृत्यु दर छह से 10 फीसदी के करीब है। इस समय ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना वाले औसतन 10 घायलों की रोजाना मौत हो रही है।
इसका रखें ध्यान
- बारिश के समय दृश्यता प्रभावित होती है, इसलिए वाहन की गति कम रखें।
- सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है, इसलिए सावधानी बरतें।
- बारिश के दौरान घर पहुंचने की जल्दबाजी न दिखाएं, बेहतर है कि वाहन रोक लें।
- वाहन चलाते समय सीट बेल्ट और हेलमेट का उपयोग करें।
- नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
- दुर्घटना होने पर घायल को जल्द से जल्द प्राथमिक उपचार देने का प्रयास करें।
सावधानी बरतने से घटेंगे हादसे
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. सुधीर सिंह का कहना है कि बारिश में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। इसलिए वाहन चलाने में सावधानी बरतें। इससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।