हम लें तो पाक-साफ, दूसरे के साथ जाए तो दागी। विभिन्न आरोपों से घिरे सियासी नेताओं को लेकर राजनीतिक दलों का रवैया कुछ इसी तरह का होता जा रहा है।
बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के सपा में विलय को संसदीय बोर्ड ने भले ही लाल झंडी दिखाई हो लेकिन समाजवादी पार्टी में दागियों की एंट्री जारी है। कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव के बाद पूर्व मंत्री अयोध्या पाल भी सपा में शामिल हो गए हैं।
कौमी एक ता दल के सपा में विलय की घोषणा 21 जून को शिवपाल सिंह यादव ने की थी। इससे नाराज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसी दिन विलय के सूत्रधार कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया था।
मुलायम ने उन्हें ही कौमी एकता दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी और विधायक सिगबतुल्ला अंसारी से बातचीत के लिए भेजा था। 25 जून को सपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने इस विलय को खारिज कर दिया था। उस समय संदेश गया था कि बाहुबली, दागी नेताओं को लेकर सपा में शीर्ष नेतृत्व की राय जुदा-जुदा है।