अब जब भी किसी सड़क, नाली या गली का निर्माण कार्य प्रस्तावित किया जाएगा तो उसके औचित्य की रिपोर्ट भी सम्बंधित अभियंता को देनी होगी।
जब और जहां चाहा सड़क बना दी। ऐसा अब नहीं चलेगा। सड़क बनाने से पहले उसके निर्माण का औचित्य बताना होगा। नगर निगम के अभियंता मनमर्जी से सड़क निर्माण नहीं करा सकेंगे।
इस संबंध में नगर निगम प्रशासन अभियंताओं को जल्द ही आदेश जारी करेगा। सड़क निर्माण का प्रस्ताव बनाने वाले अभियंता को बताना होगा कि जहां सड़क बनाई जानी है वहां की आबादी कितनी है।
पहले कब सड़क बनी थी और उस पर कितना पैसा खर्च हुआ था। इसके अलावा कई अन्य बिंदुओं की जानकारी भी इंजीनियर को देनी होगी।
नगर आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने बताया कभी-कभी इस आशय की शिकायत मिलती है कि जिन स्थानों पर सड़क ज्यादा खराब है और सड़क निर्माण की ज्यादा आवश्यकता है।
वहां पर सड़क का निर्माण न कराकर उन स्थानों पर कर दिया गया जहां पर दो-तीन वर्ष पहले ही सड़क बनी थी। इतना ही नहीं कभी-कभी तो सड़क ऐसी जगह बना दी जाती है।
जहां न तो अधिक मकान हैं और न ही उससे लाभान्वित होने वाले परिवार अधिक होते हैं।
इसको देखते हुए अब जब भी किसी सड़क, नाली या गली का निर्माण कार्य प्रस्तावित किया जाएगा तो उसके औचित्य की रिपोर्ट भी सम्बंधित अभियंता को देनी होगी।
ताकि प्रस्ताव मंजूर करने से पहले यह देखा जा सके कि जहां पर सड़क बनाई जानी है वहां कितनी आबादी और उससे कितने परिवारों को फायदा होगा।
किसी सड़क का निर्माण क्यों किया जाना जरूरी है, इसकी रिपोर्ट मांगे जाने से सिर्फ कमीशनबाजी के लिए होने वाले फालतू निर्माण पर रोक लगेगी। साथ ही नगर निगम का खर्च भी कम होगा।
नगर निगम पर इस समय दो अरब रुपये की देनदारी है। जानकारों का कहना है कि यह देनदारी बजट से अधिक काम स्वीकृत किए जाने के कारण हुई है। यदि बजट के हिसाब से काम किया जाता तो यह नौबत ही नहीं आती।