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खत्म होगा आम्रपाली योजना के आवंटियों का इंतजार

Mon, 23 Dec 2013 01:42 AM IST
प्रवेंद्र गुप्ता/लखनऊ
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पेशे से शिक्षक विनोद कुमार ने तीन साल पहले सेमी फिनिश्ड मकान लिया। आज तक यह मकान पूरा नहीं हो पाया। विनोद बताते हैं कि जब काम शुरू करने की कोशिश की कुछ लोग आकर काम बंद करा देते।
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खुद को किसान बताने वाले ये लोग निर्माण सामग्री भी उठा ले जाते। वह कहते हैं, कर्ज लेकर मकान लिया था, अब तक सिर्फ किस्तें ही अदा कर रहा हूं।

सुरेश नाथ मोदी रिटायर्ड इंजीनियर हैं। नौ साल पहले इन्हें प्लॉट आवंटित हुआ था लेकिन आज तक मकान नहीं बनवा सके। इसका कारण पूछने पर कहते हैं कि किसानों के आतंक से हिम्मत ही नहीं पड़ी।

जिक्र छिड़ते ही उनके चेहरे पर कर्ज की चिंता उभर आती है। कहते हैं, कर्ज लेकर प्लॉट खरीदा और आज तक किस्तें अदा कर रहा हूं। बहरहाल अब एक उम्मीद जगी है कि अपना घर बन जाएगा।
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हरदोई रोड स्थित आवास विकास परिषद की आम्रपाली योजना में ऐसी सैकड़ों बानगियां हैं जिनके आशियाने के सपने पर अराजक किसानों ने ग्रहण लगा रखा है। जिसने मकान बनाने की कोशिश की उसे भुगतना पड़ा।

फिर भी हार नहीं मानी। यहां ऐसे कई लोग हैं जो एक उम्मीद का दीया जलाए हुए कई-कई साल से कर्ज की किस्त भर रहे हैं। ऐसे भी ढेरों लोग हैं जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद अपने आशियाने की चाहत में पूरी जमा पूंजी लगा दी।

किसानों की अराजकता पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया तो बुझता उम्मीदों का दीया फिर से रोशन होने लगा है।

इस इलाके में छेनी-हथौड़ी की ईंटों पर ठक-ठक सुनाई देने लगी। पुलिस के लगातार राउंड के बीच सपने आकार लेने लगे। वर्ष 2004 में आवास विकास परिषद ने इस योजना में आवंटन शुरू किया था।

कब्जा मिलने के बाद जब आवंटी निर्माण करने पहुंचे तो किसानों ने बढ़े हुए मुआवजे की मांग रखकर आवंटियों को यहां से खदेड़ना शुरू कर दिया।नतीजा यह हुआ की लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी लोग अपना घर नहीं बना सके।

जब भी किसी ने हिम्मत कर बनाने की कोशिश की तो किसानों ने धावा बोलकर तोड़फोड़ शुरू कर दिया। विरोध पर आवंटी और मजदूरों के साथ मारपीट की और निर्माण सामग्री तक उठा ले गए। जो निर्माण होता था उसे ढहा देते थे।

शिकायत पर पुलिस भी किसानों और आवास विकास के बीच का मामला बताकर कोई कार्रवाई नहीं करती थी। दो दिन पहले हाईकोर्ट ने किसानों द्वारा वैध आवंटियों को निर्माण से रोकने पर सख्त नाराजगी जताई थी।

सालों से लंबित पड़े मामले में हाईकोर्ट के दखल के बाद योजना का माहौल बदल चुका है। योजना में सेमी फिनिश्ड मकान लेने वाले आवंटियों ने फिर से निर्माण शुरू करवा दिया है।

रंग लाया शिक्षिका का प्रयास
पिछले नौ साल से किसानों के उपद्रव से आजिज आ गए तो सबने एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया। इसके लिए इस साल जुलाई में आम्रपाली आवासीय समिति का गठन किया।

इसकी कमान तेज तर्रार शिक्षिका सुमन ओझा के हाथ में दी गई। इनकी अगुवाई में समिति ने आवास विकास, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय विधायक के सामने अपना कष्ट रखना शुरू किया।

कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदेालन भी किया। इस दौरान कई बार कथित किसान नेताओं ने सुमन को डराने का प्रयास भी किया लेकिन वह डिगी नहीं और अब उनका प्रयास रंग लाया।

दो दिन में बदल गए हालात
आम्रपाली आवासीय समिति की अध्यक्ष सुमन व अन्य आवंटी बताते हैं कि दो दिन पहले तक हालात बहुत खराब थे। दिनदहाड़े खुद को किसान बताने वाले लोग आते थे और काम बंद करा देते।

विरोध पर मारपीट करने लगते। सीमेंट, मौरंग, बालू और टिम्बर का सामान तक उठा ले जाते। पुलिस भी शिकायत पर कुछ नहीं करती थी तोर आवास विकास भी अपना पल्ला झाड़ लेती थी।
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