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खादी ग्रामोद्योगः रिटायरमेंट घोटाले में आरोप-प्रत्यारोप शुरू

Wed, 08 Jan 2014 08:29 AM IST
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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खादी ग्रामोद्योग विभाग के कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 साल करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई डेढ़ साल पहले ही होनी थी।
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मुख्यमंत्री के एक सवाल ने अफसरों को बचाने का काम किया। तभी से कार्रवाई की यह फाइल वित्त विभाग से खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के बीच चक्कर काट रही थी।

अब इस मामले में सरकार और विप्ाक्षी आरोप-प्रत्यारोप में लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में उम्र बढ़ाने का खुलासा 2011 में सेवानिवृत्त हो रहे अफसरों, कर्मियों के बारे में पूछताछ के समय हुआ था।

तब खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, शासन में खादी विभाग और वित्त विभाग के बीच लंबी लिखा पढ़ी में यह बात साफ हुई कि बोर्ड ने अपने अफसरों, कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के लिए सरकार से कोई अनुमति नहीं ली।

लिखा पढ़ी यहां तक बढ़ी कि शासन की अनुमति लिए बिना उम्र बढ़ाने की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी और वित्त नियंत्रक पर तय करते हुए कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई।
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जानकार बताते हैं कि तत्कालीन खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राजाराम पांडेय ने 22 मई 2012 को कार्रवाई का प्रस्ताव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अनुमोदन के लिए भेज दिया था।
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मगर मुख्यमंत्री ने अनुमोदन देने के बजाय यह सवाल पूछ लिया कि खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग बोर्ड के कार्मिकों की रिटायरमेंट आयु के संबंध में क्या नीति अपना रहा है?

पिछले डेढ़ साल से शासन में यह फाइल अटकी हुई है और 58 साल की सेवा पूरी कर आगे की ड्यूटी कर रहे अधिकारी व कर्मचारी बेचैन हैं।
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