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आपराधिक इतिहास वाले 288 नेताओं को मिली कड़ी सुरक्षा

Wed, 08 Jan 2014 08:25 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला ब्यूरो
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सुरक्षा मुहैया कराने के मामले में हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद सरकार आपराधिक छवि वाले लोगों पर मेहरबान है। अदालत का रुख भांप सरकार ने कुछ की सुरक्षा वापस लेने के निर्देश दिए लेकिन इनमें उनका नाम नहीं है।
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जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। जबकि सरकार ने अदालत में दाखिल किए गए अपने जवाब में स्वीकारा था कि आपराधिक छवि वाले 288 लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई गई है।

हाईकोर्ट के मांगे गए स्पष्टीकरण पर सरकार ने सभी जिलों के डीएम व एसएसपी को उन 163 लोगों की सुरक्षा वापस लेने के आदेश दिए है।

जिन्हें संबंधित जिले की सुरक्षा समिति की रजामंदी के बगैर सुरक्षा मुहैया करा दी गई थी। साथ ही सभी जिलों को कहा गया है कि जिन लोगों को तय खर्च भुगतान की शर्त पर सुरक्षा मुहैया कराई गई है।
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वे अगर भुगतान नहीं कर रहे तो उनसे एक हफ्ते में जमा कराने को कहा जाए। अगर वे भुगतान नहीं करते तो उनको दी गई सुरक्षा वापस ले ली जाए। ऐसे 352 लोग हैं जिन्होंने शुल्क जमा नहीं किया है।

सुरक्षा शाखा की ओर से पिछले दिनों तैयार किए गए ब्यौरे के मुताबिक शुल्क का कुल बकाया इस समय एक करोड़ 82 लाख रुपये से अधिक हो गया।

पिछले दिनों सुरक्षा पर आ रहे लंबे-चौड़े खर्च का मुद्दा उठने के बाद सरकार के निर्देश पर सुरक्षा शाखा ने यह ब्यौरा तैयार किया था।

अनिल कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव गृह के मुताबिक उच्च अदालत के निर्देशों के अनुपालन में ही कुछ लोगों से सुरक्षाकर्मी वापस लिए जा रहे हैं। ऐसा सभी मामलों में नहीं हो रहा है।

क्या कहा था सरकार ने अदालत में
पिछले दिनों जनहित याचिका के मामले में सरकार ने अदालत में अपना जवाब दाखिल कर बताया कि  क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले 288 लोगों को सुरक्षा दी गई है।

562 ऐसे लोग हैं, जिनके पास असलहे का लाइसेंस है और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई है। अपने जवाब में सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि जिलों की सुरक्षा समितियों की रजामंदी नहीं होने के बावजूद 163 को सुरक्षा दी गई है। वहीं अदालत के आदेश पर प्रदेश में कुल 127 लोगों को सुरक्षा दी गई है।

मुख्यमंत्री की सुरक्षा में कटौती नहीं
हालांकि, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सुरक्षा कम करने और फ्लीट के वाहनों की संख्या कम करने का हाल ही में बयान दिया है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है।

फ्लीट के वाहनों को तभी कम कर दिया गया था, जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ थी। पिछले दिनों लॉयन सफारी पर जाने के दौरान उनके साथ बमुश्किल चार-पांच वाहन थे।
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तीन एस्कार्ट चलते हैं, एक पायलट वाहन होता है, एक पार्टी कार होती है, एक एंबुलेंस और एक टेल वाहन होता है।
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