पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की तर्ज पर परिषद चुनाव में भी भाजपा केवल प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रबंधन करेगी, वित्तीय प्रबंधन प्रत्याशी को स्वयं करना होगा। उधर, पार्टी ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों, क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों, जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी और पार्टी की विचारधारा से जुड़े ग्राम प्रधानों को भी परिषद चुनाव के मद्देनजर साधने की तैयारी शुरू कर दी है।
भाजपा की आगामी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में इस पर भी मंथन किया जाएगा। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष चुनाव की तरह परिषद चुनाव में भी 80 से 90 प्रतिशत सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में चौतरफा लहर चलाना चाहती है, ताकि विधान सभा चुनाव में उसका लाभ उठाया जा सके।
सपा से टूट सकते हैं सदस्य
वर्तमान में निकाय क्षेत्र से सपा के विधान परिषद सदस्यों में कुछ सदस्य टूटकर भाजपा में जा सकते है। कुछ सदस्यों ने क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन दिखाते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क भी शुरू किया है। उनका मानना है कि प्रदेश में चुनाव में सत्ताधारी दल का प्रभाव चलेगा। लिहाजा भाजपा से अलग रहकर सीट जीतना उनके लिए मुश्किल होगा।