बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) की अजब-गजब स्थिति है। एक तरफ तो यहां आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को तीन-चार महीने तक वेतन नहीं मिल पा रहा है।
वहीं, विवि में जो अधिकारी इनटाइटल्ड नहीं हैं वे भी विश्वविद्यालय की गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही नहीं, कई अधिकारी बिना किसी काम के मानदेय का भी लाभ ले रहे हैं।
विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इसका मामला उठाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति खराब हुई है, जिसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई तरह की कटौतियां की गई हैं।
इसके बाद भी वर्तमान में तीन सौ से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं मिला है, जबकि अधिकारियों को जो चीजें निर्धारित भी नहीं हैं वे इसका लाभ ले रहे हैं।
हाल में परीक्षा नियंत्रक प्रो. कमान सिंह ने कुलपति प्रो. संजय सिंह को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि उनके पास परीक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार है। फिर भी उन्हें विभाग के सुचारु कामकाज के लिए वाहन नहीं उपलब्ध कराया गया है।
जबकि नियमानुसार रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर समेत कई नॉन इनटाइटल्ड अधिकारियों को विश्वविद्यालय की ओर से वाहन दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया है कि कोविड-19 संक्रमण के कारण काफी लंबे समय से विवि के छात्रावास बंद हैं।
फिर भी डीएसडब्ल्यू, प्रॉक्टर, डिप्टी प्रॉक्टर, असिस्टेंट प्रॉक्टर आदि छात्रावास के नाम पर मानदेय ले रहे हैं, जबकि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है।
प्रो. सिंह ने कुलपति से मांग की है कि नॉन इनटाइटल्ड अधिकारियों के गाड़ी इस्तेमाल करने व हॉस्टल बंद होने के बाद भी भत्ते आदि का लाभ लेने वाले अधिकारियों की जांच कराकर उनसे रिकवरी की जाए।
यह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समय से वेतन देने में भी सहयोगी होगी। जानकारी के अनुसार परीक्षा नियंत्रक के इस पत्र के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मचा है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने अधिकारियों को बचाने की कवायद में लग गया है।
विवि ने बनाई जांच कमेटी
परीक्षा नियंत्रक प्रो. कमान सिंह द्वारा भेजे गए पत्र के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी नियमानुसार इस मामले की जांच करके अपनी रिपोर्ट देगी। विश्वविद्यालय प्रशासन उसके अनुसार कार्रवाई करेगा। कर्मचारियों के वेतन के जैसे-जैसे बिल मिलते जा रहे हैं, उसका वैसे-वैसे प्रोसेस किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की तरफ से इसमें देरी नहीं हो रही है।
- डॉ. रचना गंगवार, प्रवक्ता, बीबीएयू