हाईकोर्ट ने कहा है कि गंभीर और जघन्य अपराधों के आरोपी को मंत्री बनाने से मुख्यमंत्री को संवैधानिक तौर पर नहीं रोका जा सकता, लेकिन संवैधानिक तौर पर मुख्यमंत्री से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी ऐसे व्यक्ति को मंत्री बनाने के लिए राज्यपाल से सिफारिश नहीं करेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गायत्री प्रसाद प्रजापति को प्रदेश सरकार द्वारा फिर से मंत्री बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। हाईकोर्ट का कहना है कि मुख्यमंत्री को किसी व्यक्ति को मंत्री बनाने का पूरा अधिकार है।
अपने निर्णय में चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले और राजन राय ने कहा कि मौजूदा मामले में गायत्री प्रजापति पर याची ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन उन्हें मंत्री बनाना पूरी तरह मुख्यमंत्री के क्षेत्र का मामला है, जिनके सुझाव पर राज्यपाल ने मंत्रिपरिषद में उन्हें शामिल किया।
राज्यपाल को मुख्यमंत्री के सुझाव पर मंत्री को उसके पद से हटाना या मंत्रिपरिषद से बाहर निकालना होता है, जैसा मौजूदा मामले में किया गया। इस तरह के मामले में तभी हस्तक्षेप किया जा सकता है जबकि मंत्री पद पर मौजूद व्यक्ति को किसी संवैधानिक प्रावधान या फिर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत हटाया जा चुका हो। गायत्री के मामले में ऐसा नहीं हुआ है। अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने ऐसी कोई वजह नहीं बताई है जिसमें गायत्री को मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने से अयोग्य करार दिया गया हो।