हाईकोर्ट का डंडा पड़ने से पहले विकास शुल्कों और मानचित्र शुल्कों के नाम पर बिना कोई नीति के ही लखनऊ विकास प्राधिकरण हर साल करोड़ों रुपये वसूल रहा है।
अभी करीब दो महीने पहले ही प्राधिकरण ने विकास शुल्क और अन्य मदों में बढ़ोतरी भी की थी। मजे की बात यह कि कौन से इलाकों में कौन सा शुल्क वसूला जाएगा? इसको लेकर प्राधिकरण ने जो नीति बनाई है, वह भी स्पष्ट नहीं है।
हजरतगंज जैसा क्षेत्र जहां नगर निगम सारे विकास कार्य करवाता है, वहां भी अच्छा खासा विकास शुल्क एलडीए वसूलता है। इसको लेकर कई बार आपत्तियां भी उठाई जा चुकी है।
मगर इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद एलडीए में हलचल तो है मगर बयान देने को लेकर कोई भी राजी नहीं है।
उपाध्यक्ष एमपी अग्रवाल और मुख्य नगर नियोजक जेएन रेड्डी दोनों ही का कहना है कि फैसले की कॉपी के विस्तृत अध्ययन के बाद ही वह कुछ बता पाएंगे।
हाईकोर्ट ने बीते रोज एक फैसला दिया जिसके मुताबिक, प्रदेश के प्राधिकरणों के पास मानचित्र संबंधित शुल्क और विकास शुल्क वसूलने का कानून तो है मगर उसकी कोई नीति नहीं है।
सभी प्राधिकरण अपने अपने हिसाब से नीति बना कर अवैध तरीके से जनता से वसूली कर रहे हैं। इसलिए हाईकोर्ट ने सभी तरह के मानचित्र शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी।
सुविधाएं दूसरे महकमे की टैक्स ले रहा एलडीए
विकसित इलाकों से लिए जा रहे वाह्य विकास शुल्क को लेकर जिन सुविधाओं को देने का वादा प्राधिकरण करता है, उन्हीं सुविधाओं के लिए उन्हीं इलाकों में नगर निगम और जल संस्थान भी भवन निर्माण करने वालों से टैक्स वसूल रहे हैं।
लोगों को बढ़े वाह्य विकास शुल्क के अतिरिक्त करीब 20 फीसदी अतिरिक्त कर भी देना पड़ रहा है। नगर निगम, सुधारीकरण, मलबा हटाने और जल संस्थान भवन बनाने के लिए पानी देने का कर प्रति वर्ग फीट के हिसाब से वसूल रहा है।
यही कर एलडीए अपने वाह्य विकास शुल्क के साथ भी ले रहा है। इस तरह से कुल टैक्स बढ़कर करीब 120 फीसदी हो गया है। यानी भवन बनाना और मुश्किल होता जा रहा है।
प्राधिकरण ने अपनी पुराने नियम, अविकसित, विकसित और पूर्ण विकसित की जगह, पूर्व विकसित, विकसित और अविकसित क्षेत्र में विभाजित कर दिया है।
इसमें सिर्फ पूर्व विकसित क्षेत्रों में वाह्य विकास शुल्क नहीं लिया जाता बाकी सभी क्षेत्रों में भवन निर्माण के दौरान एलडीए विकास शुल्क लेता है।
200 साल के गंज को बता दिया नई कॉलोनी
2010 में 200 साल पूरे कर चुके हजरतगंज इलाके में लोगों पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एक अजीबो-गरीब टैक्स लाद दिया। इस इलाके में रहने वाले लोगों को तबसे वाह्य विकास शुल्क देना पड़ रहा है।
यह शुल्क प्राधिकरण अपनी नई विकसित या फिर विकसित की जा रही कॉलोनियों में लेता है। पुराने इलाकों में यह कर नहीं लगाया जाता है।
मगर शासन के पैसे से विगत वर्ष किए गए 800 मीटर की सड़क के विकास कार्यों का बदला पूरे क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों पर कर का बोझ डाल कर वसूला जा रहा है।
सबको दो कर, तब बनेगा घर
वाह्य विकास शुल्क के मानकों के हिसाब से भवन निर्माण के दौरान घरों के बाहर से मलबा उठाना, सड़क का सुधार करना और सफाई आदि का काम शुल्क लेने वाली संस्था को करना चाहिए।
मगर एलडीए विकसित क्षेत्रों में यह काम नहीं करता है मगर शुल्क वसूल लेता है। लोगों के लिए बिजली और पोल का इंतजाम करने का काम भी विकासकर्ता एजेंसी का होता है। ऐसे में एलडीए किस आधार पर विकास शुल्क ले सकता है।