शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की छह सितंबर को बड़ा इमामबाड़ा में प्रस्तावित उलमा की रैली को जिला प्रशासन ने अनुमति देने से इन्कार कर दिया है।
जिला प्रशासन ने उपचुनाव और धारा 144 का हवाला देते हुए कहा है कि बिना अनुमति बड़ा इमामबाड़ा और उसके आसपास जमावड़ा दिखा तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा। साथ ही शुक्रवार की रात से ही बड़े इमामबाड़े में ताला डाल दिया जाएगा।
उधर, रैली पर अड़े मौलाना जव्वाद का कहना है कि रैली किसी के विरोध में नहीं बल्कि जुल्म और जालिम के खिलाफ है, जो किसी सूरत में स्थगित नहीं की जाएगी। रैली होगी और उसमें देश भर के उलमा शामिल होंगे।
प्रशासन पूरी तरह तैयार
मौलाना जव्वाद की रैली की अनुमति की अर्जी को बृहस्पतिवार को खारिज करने की जानकारी देते हुए अपर जिलाधिकारी पश्चिम एसएचपी शाही ने बताया कि जिला प्रशासन ने उपचुनाव के चलते और धारा 144 के मद्देनजर शनिवार को बड़ा इमामबाड़ा और आसपास किसी तरह की रैली की अनुमति नहीं दी है।
अगर अनुमति के बिना किसी तरह की रैली और प्रदर्शन का प्रयास किया गया तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा। प्रशासन ने इससे निपटने की पूरी तैयारी कर ली है।
शनिवार को बड़ा इमामबाड़ा परिसर में किसी को दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। इमामबाड़ा मुख्य परिसर और उसके पीछे के हिस्से में फोर्स तैनात कर दी जाएगी। साथ ही शुक्रवार की रात से ही बड़ा इमामबाड़ा में ताला डाल दिया जाएगा।
मौलाना बोले, नहीं मिला कोई जवाब
उधर, मौलाना कल्बे जव्वाद ने सिब्तैनाबाद इमामबाड़े में एक प्रेस वार्ता में कहा है कि छह सितंबर को बड़े इमामबाड़े में रैली को लेकर जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है।
उनका कहना है कि 12 बजे तक प्रशासन से अनुमति का जवाब मांगा था, लेकिन उन्हें किसी तरह का जवाब नहीं मिला है इसलिए वे प्रशासन की हां समझ रहे हैं।
दिया मुलायम से मुलाकात का हवाला
मौलाना ने कहा कि छह सितंबर को बड़े इमामबाड़ा परिसर में रैली किसी के विरोध में नहीं बल्कि जालिम और जुल्म के खिलाफ है।
दुनिया में बढ़े आतंक और आतंकवाद को लेकर पूरे देश से तकरीबन हर प्रदेश व हर जिले से उलमा और उनके समर्थक इस रैली में शामिल होने आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इसके लिए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से भी वे मुलाकात कर चुके हैं। मौलाना ने कहा कि इस रैली में सपा प्रमुख का संदेश भी पढ़ा जाना है, जिसके लिए खुद मुलायम सिंह यादव ने वादा किया है।
उन्होंने कहा कि अगर इस रैली को रोकने का प्रयास किया गया तो टकराव की स्थिति बनेगी और माहौल खराब होगा, जिसका जिम्मेदार सिर्फ जिला प्रशासन होगा।