फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: रीढ़ की सर्जरी के लिए अब नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली-मुंबई

विज्ञापन
ऑपरेशन करने वाली टीम।
विज्ञापन
लखनऊ। एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में रीढ़ की गंभीर चोट का इलाज और सर्जरी आसान हो गई है। यहां नई ओ-आर्म तकनीक से मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों का दावा है कि छोटे से चीरे से ऑपरेशन संभव हो सका है। अभी तक इस सर्जरी के लिए मरीजों को दिल्ली-मुंबई जाना पड़ता था। संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।
विज्ञापन

कानपुर निवासी 32 वर्षीय युवक फैक्टरी में काम करने के दौरान जख्मी हो गया था। उसकी रीढ़ की हड्डी के डी-10 हिस्से में फ्रैक्चर हो गया था। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख एवं न्यूरो सर्जन प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रो. आशुतोष कुमार ने ओ-आर्म तकनीक से उसकी सर्जरी की। इसमें डॉ. पवन वर्मा, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. सौमेन कांजीलाल, डॉ. श्रेयश राय तथा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. वंश और डॉ. प्रतीक बैस सहित अन्य चिकित्सकों ने सहयोग दिया।





छोटे चीरे से हुआ सफल ऑपरेशन

प्रो. आशुतोष कुमार ने बताया कि ओ-आर्म तकनीक से सर्जरी में मरीज की रीढ़ की हड्डी को स्थिर करने के लिए छोटे चीरे लगाकर स्क्रू लगाए गए। इससे शरीर को कम नुकसान पहुंचा और खून भी कम बहा। इससे मरीज जल्दी चलने-फिरने भी लगता है। ओ-आर्म मशीन ऑपरेशन के दौरान रीढ़ की हड्डी की साफ थ्री-डी तस्वीर तुरंत दिखाती है। इससे स्क्रू सही जगह लगाने में आसानी होती है और ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित हो जाता है। मरीज और डॉक्टरों पर रेडिएशन का असर भी कम पड़ता है।
विज्ञापन






निजी संस्थानों में पांच लाख का आता है खर्च

प्रो. आशुतोष ने बताया कि संस्थान में पूरी सर्जरी का खर्च इम्प्लांट सहित करीब डेढ़ लाख रुपये आया। निजी अस्पताल में पांच लाख रुपये तक खर्च आता है। उन्होंने कहा कि इम्प्लांट की कीमत हर जगह लगभग समान होती है। नर्सिंग केयर, दवाओं और अन्य सुविधाओं के कारण खर्च में अंतर आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें