भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने अक्तूबर, नवंबर व दिसंबर की श्रवण यात्राएं स्थगित कर दी हैं। धर्मार्थ कार्य विभाग से बजट नहीं मिलने के कारण निगम ने यह फैसला किया है।
बता दें कि धर्मार्थ कार्य विभाग की ओर से प्रदेश के बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को श्रवण यात्राएं कराई जाती हैं, जिसमें आईआरसीटीसी सर्विस प्रदाता के तौर पर काम करता है। इसके तहत बुजुर्गों के लिए निशुल्क ट्रेनें चलाई जाती हैं, जो उन्हें तीर्थस्थलों की यात्राएं कराती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में समाजवादी श्रवण यात्रा के नाम से योजना शुरू हुई थी। जब भाजपा सरकार आई तो नाम बदलकर मुख्यमंत्री श्रवण यात्रा कर दिया गया।
आईआरसीटीसी के अधिकारियों ने बताया कि श्रवण यात्रा की योजना तैयार हो चुकी थी। धर्मार्थ कार्य विभाग प्रति यात्रा एक करोड़ रुपये का भुगतान करता है। कुल 14 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इस कारण अक्तूबर, नवंबर व दिसंबर में होने वाली यात्राएं स्थगित कर दी गई हैं। ये यात्राएं अब अगले साल होने की उम्मीद है।
दस हजार बुजुर्गों ने की तीर्थयात्रा
- फोटो : amar ujala
आईआरसीटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि श्रवण यात्रा से करीब दस हजार बुजुर्गों को दक्षिण भारत के तीर्थस्थलों से लेकर मध्य व पश्चिमी भारत के दर्शन कराए गएहैं। 2016 में कुल छह श्रवण यात्रा ट्रेनें चलाई गई थीं, जबकि 2017 में अभी तक सिर्फ दो ट्रेनों का ही संचालन हो सका है।
यहां के लिए थी तैयारी
आईआरसीटीसी की ओर से अक्तूबर में मुख्यमंत्री श्रवण यात्रा के तहत बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को द्वारका व सोमनाथ दर्शन के लिए ले जाया जाना था। नवंबर में मदुरै व रामेश्वरम और दिसंबर में पुरी व कोणार्क की यात्रा होनी थी, पर इसे क्रमश: जनवरी, फरवरी व मार्च के लिए टाल दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बजट नहीं मिलने पर इसे फिर स्थगित किया जा सकता है।
मामले पर आईआरसीटीसी मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक अश्विनी श्रीवास्तव का कहना है कि धर्मार्थ कार्य विभाग ने 14 करोड़ रुपये का बजट आईआरसीटीसी को नहीं दिया है। इसलिए अक्तूबर, नवंबर व दिसंबर में होने वाली मुख्यमंत्री श्रवण यात्रा स्थगित कर दी गई है।