मुलायम ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में दो दल सक्रिय थे। एक कांग्रेस पार्टी और दूसरी कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी। समाजवादी धारा के लोग आजादी के आंदोलन से ही सक्रिय थे। इनमें आचार्य नरेंद्र देव विद्वान थे। वे 38 भाषाओं के जानकार थे। आचार्य नरेंद्र देव और मौलाना अबुल कलाम आजाद जहां भाषण देते थे वहां क्रांति होती थी।
उन्होंने कहा कि पहले अलग विचारधारा होने के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान था। गांधीजी का सुभाष चंद्र बोस बहुत आदर करते थे, जबकि दोनों की विचारधारा अलग थी लेकिन उद्देश्य एक था। गांधीजी ने सपना देखा था कि आजादी के बाद भेदभाव मिटेगा, गरीबी-अमीरी की खाई पटेगी। लेकिन आजाद भारत में यह अब तक अधूरा है।
पूर्व सपा अध्यक्ष ने कहा कि आजादी के बाद पं. जवाहल लाल नेहरू ने समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को कांग्रेस में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। इस पर लोहिया ने उनके सामने 14 सूत्री प्रस्ताव रखा था। आचार्य नरेन्द्र देव ने लोहिया से कहा था कि नेहरू उनके प्रस्तावों से सहमत नहीं होंगे और हुआ भी यही। डॉ. लोहिया की अगुवाई में आजादी के बाद भी आंदोलन हुए। मुझे भी उनमें जेल जाना पड़ा।