उन्नाव में बलात्कार पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव राजीव कुमार और डीजीपी ओम प्रकाश सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि विधायक पर गंभीर आरोप लगाने वाली किशोरी के द्वारा आत्मदाह के प्रयास के कुछ ही घंटों बाद उसके पिता की जेल में मौत हो जाती है। पीड़ित परिवार ने विधायक के इशारे पर जेल में हत्या कराए जाने का आरोप लगाया है। अगर यह आरोप सही हैं, यह न सिर्फ गंभीर मामला है बल्कि मानवाधिकार हनन का भी मामला है।
आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट दोषी पुलिस कर्मियों पर की गई कार्रवाई की जानकारी के साथ जेल में प्रवेश और जेल अधिकारियों द्वारा दी गई चिकित्सा उपचार के समय मृतक की स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट सहित सभी रिपोर्टे तलब की है। इसके लिए आयोग ने चार सप्ताह का समय दिया है।
आयोग ने मुख्य सचिव से इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़ित परिवार का विरोधियों द्वारा उत्पीड़न और अपमान न हो। डीजीपी से इस पर भी जवाब देने को कहा है कि आखिर न्यायिक अभिरक्षा में मौत के मामले 24 घंटे के अंदर आयेाग को सूचना क्यों नहीं दी गई।
एफआईआर से क्यों शामिल नहीं किया अतुल सेंगर का नाम
आयोग ने तीन अप्रैल की घटना का जिक्र करते हुए कहा है कि जब देवेंद्र सिंह के घर में घुसकर उसकी बेरहमी से पिटाई की गई और पीड़ित परिवार ने विधायक के भाई के खिलाफ तहरीर दी, तो उनका नाम किस आधार पर निकाला गया।