हो सकता है कि किसी को कल तक गांव में मांगने के बावजूद मनरेगा में काम न मिलता रहा हो, लेकिन अब अधिकारी काम देने से इन्कार नहीं कर पाएंगे।
यही नहीं, वे मजदूर अड्डों पर पहुंचकर मनरेगा से मजदूरों की बेरुखी की वजह भी तलाशेंगे।
शासन ने पहली बार सूबे की सभी 52 हजार ग्राम पंचायतों में 1 व 15 नवंबर को ‘आओ, काम लो अभियान’ चलाने का फैसला किया है।
इसके तहत एक व 15 नवंबर को कैंप लगाए जाएंगे। काम न देने की शिकायत पर संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में प्रदेश में तेज रफ्तार से काम हुआ, लेकिन पिछले दो-तीन महीने में इसमें काफी सुस्ती आ गई है।
प्रियंका ने लगाई चौपाल, लोगों ने सुनाई समस्याएं
इसे देखते हुए योजना को रफ्तार देने के लिए उच्च स्तर पर ‘आओ, काम लो अभियान’ चलाने का फैसला किया गया है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इसके पहले महिलाओं व दलितों की सहभागिता बढ़ाने व जॉब कार्ड देने के लिए अभियान चलाया गया।
लेकिन गांव के आदमी को गांव के प्रमुख लोगों की मौजूदगी में कैंप लगाकर काम देने का अभियान पहली बार चलाया जाएगा।
जानकार बताते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में मनरेगा की बदहाली प्रमुख मुद्दा होगी।
केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की मनरेगा की सीबीआई जांच की मांग व प्रदेश सरकार की इसके प्रति बेरुखी पहले ही इसका संकेत कर चुकी है।
सीएजी रिपोर्ट ने इसकी पृष्ठभूमि बनाने का काम पूरा कर दिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कामयाबी में मनरेगा को एक अहम वजह माना गया था।
अब प्रदेश सरकार आगामी लोकसभा चुनाव के पहले लोगों के बीच किसी भी दशा में यह संदेश नहीं जाने देना चाहती कि पैसा होने के बावजूद उसकी वजह से लोगों को रोजगार नहीं मिला।
यह अभियान लोगों के बीच सूबे की सरकार की योजना के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने का बड़ा प्रयास है।
जयराम ने लिखी अखिलेश को ये कैसी चिट्ठी?
शासन ने अभियान में काम मांगने वाले श्रमिकों को अनिवार्य रूप से काम देने व शिकायत पर कड़ी कार्रवाई जैसे कदमों की घोषणा भी की है।
आयुक्त ग्राम्य विकास के. रविंद्र नायक ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी किया है।
इसमें कहा गया है कि यदि काम की मांग के मद्देनजर अतिरिक्त रकम की जरूरत है तो बताएं, विभाग रकम उपलब्ध कराएगा।