आलीशान पार्टियां आयोजित करना और उसमें धूमधड़ाका अब लोगों की जेबों पर भारी पड़ेगा।
सरकार ऐसी पार्टियों को मनोरंजन कर के दायरे में लाने जा रही है।
पार्टी में डीजे, आर्केस्टा पार्टी या फिर सेलेब्रेटी को बुलाना मनोरंजन कर के दायरे में होगा।
इस तरह की पार्टी करने वालों से खर्च का 25 फीसदी मनोरंजन कर के रूप में लिया जाएगा।
मनोरंजन कर निदेशालय के इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय तब होगा जब अन्य राज्यों में इससे होने वाले फायदे का आकलन कर लिया जाएगा।
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एक अनुमान के मुताबिक, ऐसी पार्टियों से साल में कम से कम विभाग को 150 से 200 करोड़ रुपये के आय होने का अनुमान है।
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में आलीशान पार्टियों का चलन काफी तेजी से बढ़ा है।
पार्टियों में हाई सिस्टम के डीजे लगवाना और उस पर रातभर डांस होना, आर्केस्टा पार्टियों को बुलाना या फिर टीवी या फिल्मी कलाकारों को बुलाकर पार्टियों की रंगत बढ़ाने का प्रचलन आम बात हो गई है।
कलाकारों या फिर डीजे व आर्केस्टा पार्टियों पर भी अच्छा खासा पैसा खर्च किया जाता है।
मनोरंजन कर विभाग का मानना है कि इस तरह की पार्टियों से लोगों का मनोरंजन तो होता है पर विभाग की आय नहीं हो पाती है।
मनोरंजन कर विभाग ने इस पर खर्च का 25 फीसदी मनोरंजन कर के रूप में लेने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
लेनी होगी एनओसी
आलीशान पार्टियां आयोजित करने के लिए लोगों को मनोरंजन कर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेनी होगी।
उन्हें विभाग में ऐसे आयोजन पर खर्च होने संबंधी रसीद दिखानी होगी। इसके आधार पर मनोरंजन कर विभाग टैक्स की वसूली करेगा।
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विभाग से एनओसी के बगैर यदि इस तरह की पार्टियां आयोजित की जाती है और किसी तरह की शिकायत मिलती है या जानकारी आती है तो विभाग के लोग वहां पहुंच कर इसे रोक सकते हैं।
मोबाइल पर भी मनोरंजन टैक्स
मोबाइल पर यदि आप गाना सुनते हैं, रिंग टोन, कॉलर टोन डाउनलोड करते हैं या फिर अन्य किसी तरह का मनोरंजन करते हैं तो टैक्स भरने के लिए तैयार हो जाएं।
मनोरंजन कर विभाग ऐसे लोगों से टैक्स लेने की तैयारी में है। विभाग का मानना है कि महंगे सेल फोन लेने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
इस तरह के मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले अधिकतर लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और उस पर गाना सुनना, चुटकुले लोड करना, तरह-तरह के रिंग टोन लेना, कॉलर टोन लेना या फिर टीवी तक देखते हैं।
विभाग का मानना है इस तरह के लोगों पर टैक्स लगाकर करीब 100 करोड़ रुपये की आय विभाग को हो सकती है।