चालू सत्र से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की सूची मेरिट के आधार पर तैयार होगी। अब तक यह सूची छात्र के परिवार की सालाना आमदनी और उसे पिछली कक्षा में मिले अंक के आधार पर तैयार होती थी।
आय प्रमाणपत्रों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने पर राज्य सरकार ने यह फैसला किया है। इसके लिए छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नई नियमावली तैयार करवाई जा रही है।
पिछले सत्र में इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए 54.72 लाख छात्रों ने आवेदन किया था, जिसमें से 23.84 लाख आवेदन गलत प्रमाणपत्र लगाए जाने के कारण रिजेक्ट कर दिए गए। इसमें भी अधिकांश के आय प्रमाणपत्र फर्जी थे।
एनआईसी की स्क्रूटनी में पता चला कि या तो उस नाम और नंबर का आय प्रमाणपत्र राजस्व विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध ही नहीं है या फिर पिछले साल के मुकाबले छात्र ने परिवार की आय कम दिखाते हुए नया प्रमाणपत्र लगाया है।
दो लाख रुपये सलाना आमदनी तो छात्र करे आवेदन
इसलिए इस बार से भारांक (वेटेज) में आमदनी को न जोड़ने का फैसला किया गया है। मसलन, अधिकतम दो लाख रुपये सालाना आमदनी वाले परिवार का छात्र आवेदन कर सकेगा, लेकिन इस अधिकतम सीमा से कम आमदनी वाले छात्र-छात्राओं को तरजीह देने की पुरानी व्यवस्था खत्म कर दी जाएगी।
वहीं इंटरमीडिएट और आईटीआई व पॉलीटेक्निक के छात्र-छात्राओं को पहले छात्रवृत्ति देने और शुल्क प्रतिपूर्ति का नियम नई व्यवस्था में भी बरकरार रहेगा। यानी, अब वेटेज पिछली कक्षा में मिले अंक और पाठ्यक्रम के समूहों के आधार पर मिलेगा।
समाज कल्याण विभाग से जुड़े एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बाबत नियमावली तैयार करने का काम शुरू हो गया है। जल्द ही इसे अनुमोदन के लिए मुख्य सचिव के यहां भेजा जाएगा।
योजना से बाहर होंगे पीजीडीएम सरीखे कोर्स
मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में पाया गया कि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में सबसे ज्यादा घपला पीजीडीएम सरीखे पाठ्यक्रमों में हुआ है।
यह ऐसे कोर्स हैं, जिनमें संस्थान खुद ही दाखिला और परीक्षा लेता है। नई नियमावली में शिक्षण संस्थानों के स्तर पर प्रवेश और परीक्षा वाले पाठ्यक्रमों को योजना से बाहर किए जाने की व्यवस्था की जा रही है।