शोध के नए नियमों में दिव्यांग विद्यार्थियों को भी छूट दी गई है। इसके अनुसार 40 फीसदी से अधिक दिव्यांग विद्यार्थियों को भी अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय मिलेगा। वे भी अपना शोध अधिकतम आठ साल में पूरा कर सकेंगे। कई बार दिव्यांग विद्यार्थी भी विभिन्न कारणों से निर्धारित समय में शोध पूरा नहीं कर पाते थे।
विश्वविद्यालय में दो साल से पीएचडी आवेदन लंबित हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय इस बार जल्द से जल्द प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। एकेडमिक व कार्य परिषद से एप्रूवल मिलने के बाद इस महीने के अंत में ही विश्वविद्यालय प्रशासन आवेदन शुरू करने की तैयारी में है।
तिथियों पर मुहर परिषद की बैठक में लग सकती है। दो साल से प्रवेश न होने से कुछ विद्यार्थियों का नुकसान हुआ तो कुछ दूसरे विश्वविद्यालयों में चले गए। इस बार भी सत्र की शुरूआत में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसलिए कुछ विद्यार्थी अन्य विश्वविद्यालयों में जा चुके हैं।