डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भी एमबीबीएस की पढ़ाई होगी। इसके लिए इंस्टीट्यूट और लोहिया अस्पताल का विलय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
दोनों के विलय के बाद एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों के अनुसार एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए चिकित्सा संस्थान में अस्पताल भी होना जरूरी है।
इसलिए दोनों का विलय जरूरी है। इसके साथ ही लोहिया अस्पताल में भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधाएं भी मिल सकेंगी।
सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में भी अब एमबीबीएस की पढ़ाई होगी। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के बाद राजधानी का दूसरा चिकित्सा संस्थान होगा जहां चिकित्सा की बैचलर डिग्री दी जाएगी।
लोहिया इंस्टीट्यूट के सूत्रों की मानें तो प्रस्ताव बनकर लगभग तैयार है। शासन स्तर पर भी इसकी सहमति बन चुकी है। कैबिनेट के इस प्रस्ताव पर सिर्फ मोहर लगना बाकी है।
इंस्टीट्यूट और अस्पताल के विलय में आने वाली दिक्कतों को दूर करने केलिए एक कमेटी भी गठित की गई है। इसकी सदस्य इंस्टीट्यूट की डीन प्रो. नुजहत हुसैन भी हैं।
गौरतलब है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय 395 बेड का है। इसे इंस्टीट्यूट का एसोसिएट अस्पताल बनाया जाएगा।
जैसे की केजीएमयू में गांधी स्मारक व एसोसिएट हॉस्पिटल है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मानक के अनुसार स्नातक शिक्षा प्रदान करने के लिए मेडिकल कॉलेज में 100 बेड का जनरल हॉस्पिटल होना जरूरी है।
लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. आरसी अग्रवाल ने बताया कि दोनों संस्थानों के विलय का प्रस्ताव लंबे समय है। अब इस पर शासन स्तर पर तैयारी चल रही है।
वहीं इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. एमसी पंत का कहना है कि दोनों अस्पतालों के मिलने के बाद यह बड़ा शैक्षिक संस्थान बन जाएगा। अधिक से अधिक मरीजों को विशिष्ट चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही एमबीबीएस करने के इच्छुक छात्रों को एक स्तरीय संस्थान भी मिल जाएगा।
पीएमएस चिकित्सक ही चलाएंगे अस्पताल
लोहिया इंस्टीट्यूट और संयुक्त चिकित्सालय के विलय में सबसे बड़ी बाधा दोनों अस्पतालों के कर्मचारियों, चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ का है।
सूत्रों की मानें तो लोहिया अस्पताल के इंस्टीट्यूट में विलय के बाद अगले तीन वर्ष तक प्रांतीय चिकित्सक ही इसका संचालन करेंगे।
सीएमएस और एमएस भी इसी संवर्ग के होंगे। इन चिकित्सकों को शैक्षिक कार्य से अलग रखा जाएगा। इन तीन वर्षों के दौरान मानक के अनुसार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।