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डायबिटीज से छुटकारा दिलाएगी ये 'चमत्कारी' दवा

Mon, 02 Mar 2015 03:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) ने समुद्र तट पर पाई जाने वाली वनस्पति से ऐसा हर्बल कंपाउंड तैयार किया है जिससे डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। लैब में हुई टेस्टिंग में इस कंपाउंड की 250 मिग्रा डोज तीन सप्ताह तक लिए जाने के बाद डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिली।
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सीडीआरआई ने दवा को विकसित करने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं के शोध करने वाली काउंसिल से इजाजत मांगी है।
सीडीआरआई के निदेशक डॉ. राम विश्वकर्मा ने बताया कि डायबिटीज से निबटने के लिए हमने जाइलोकार्पस ग्रांटम यानी समुद्रफल से एक नया कंपाउंड तैयार किया है।

इसे सीडीआर134डी123 नाम दिया गया है। सीडीआरआई और देश की दूसरी संस्थाओं की मदद से तैयार यह कंपाउंड पूरी तरह प्राकृतिक है। इसको सीडीआरआई विकसित कर रहा है। हमने सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज से संपर्क किया है। हमने उनसे मांग की है कि सीडीआरआई को आयुर्वेद दवा की मार्केटिंग के अधिकार दिए जाएं।
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जल्द ही बाजार में उतरेगी ये हर्बल दवा

इससे इस बेहतरीन दवा को डायबिटीज मरीजों के फायदे के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। यह दवा ड्रग्स फॉर सी प्रोजेक्ट में बनी है।ऐसे तैयार किया कंपाउंड नई ड्रग के पब्लिश रिसर्च पेपर के मुताबिक समुद्रफल की शुरुआती जांच में एंटीहाइपरग्लाइसिमिक तत्व मिले।

इससे तैयार किए गए कंपाउंड की 250 मिग्रा डोज तीन सप्ताह तक लिए जाने के बाद डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद मिली। अब इस दवा का सीमित क्लीनिकल ट्रायल टाइप टू डायबिटीज के मरीजों पर किया जा रहा है। दवा को टैबलेट के रूप में लिया जा सकता है।

अभी तक वैज्ञानिक तथ्यों और शोध की कमी के चलते आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात पर बुरा असर पड़ता था। सीडीआरआई जैसी संस्था के आयुर्वेदिक दवाओं पर काम करने से इसका मानकीकरण हो सकेगा। इससे आयुर्वेदिक दवाओं की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगी। इससे आयुर्वेदिक दवाओं के मार्केट में भी मदद मिलेगी।
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